नोटबंदी के बाद पंजाब की इंडस्ट्री पर बढ़ा तालाबंदी का खतरा

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Thursday, November 24, 2016-11:59 AM

लुधियाना: सरकार के नोटबंदी के फैसले के 2 सप्ताह के भीतर ही पंजाब की औद्योगिक राजधानी लुधियाना की इंडस्ट्री की हालत खस्ता होने लगी है। हौजरी, साइकिल, सिलाई मशीन और लघु उद्योगों के कारण मानचैस्टर का दर्जा पाने वाले इस शहर की लेबर उद्योगों में तालाबंदी की हालत को देखते हुए अपने गांवों को पलायन करना शुरू हो गई है। लुधियाना में करीब 7 लाख वर्कर फैक्टरियों में काम करते हैं, जिनमें से 1 लाख से अधिक वर्कर बेरोजगार होने के कारण अपने राज्यों में लौटने लगे हैं।

500 और 1000 रुपए के नोटों पर पाबंदी के बाद घंटों बैंकों की कतारों में लगने के बाद भी नकदी हाथ में न आने से जहां श्रमिक परेशान हैं, वहीं फैक्टरी मालिक मजबूर होकर उनकी तनख्वाह देने में भी असमर्थ हो रहे हैं। महीने की 10 तारीख को पगार दिवस पर लेबर ने पुरानी बंद हुई करंसी लेने से इंकार कर दिया और जब फैक्टरी मालिकों ने चैक देने चाहे तो 80 प्रतिशत कांट्रैक्ट लेबर के बैंक खाते न होने से उन्होंने इसे लेने से इंकार कर दिया। जिन मजदूरों के बैंकों में खाते हैं, उन्होंने बैंकों में लंबी कतारों से परेशान होकर नई करंसी की मांग शुरू कर दी है।

अब आलम यह है कि कंस्ट्रक्शन बिजनैस भी ठप्प हो गया है, वहीं हौजरी का पीक सीजन भी लगभग पूरी तरह से तबाह होने के चलते लुधियाना की करीब 14 हजार हौजरी इंडस्ट्री की प्रोडक्शन लगभग ठप्प होने से लेबर बेरोजगार हो गई है। सेल न होने के कारण दुकानदारों ने भी लेबर को जवाब देना शुरू कर दिया है। कारोबारियों का कहना है कि सरकार द्वारा जल्दबाजी में लिया गया नोटबंदी का फैसला इंडस्ट्री के लिए कहीं घातक साबित न हो जाए। उधर, बिजाई का सीजन शुरू हो गया है। किसानों के पास भी श्रमिकों को देने के लिए न तो पैसा है और न ही पूरी लेबर मौजूद है।
इंडस्ट्री का कहना है कि अगर समय रहते सरकार ने राहत न दी तो इंडस्ट्री की 50 प्रतिशत लेबर जहां पलायन कर जाएगी, वहीं इंडस्ट्री पर तालाबंदी का खतरा पैदा 
हो जाएगा।

हौजरी इंडस्ट्री की 70 प्रतिशत लेबर ने किया पलायन 
हौजरी का सीजन मात्र 90 दिन का होता है। सर्दी के आरम्भ में ही सरकार ने नोटबंदी के फैसले के कारण हौजरी इंडस्ट्री तालाबंदी के कगार पर पहुंच गई है। इंडस्ट्री में 95 प्रतिशत लेबर दूसरे राज्यों से है। उसमें से 70 प्रतिशत लेबर गांवों को लौट गई है। हौजरी उद्योगों में करीब 1.5 लाख श्रमिक हैं। सरकार उद्योगों की खस्ता हालत को देखते हुए इंडस्ट्री को बचाने के लिए तुरंत प्रभावशाली उपाय करे।


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