रियल एस्‍टेट डेवलपर्स पर कर्ज बढ़कर 55 हजार करोड़

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Sunday, October 23, 2016-1:56 PM

नई दिल्‍लीः एक ओर जहां अदालतें रियल एस्‍टेट डेवलपर्स को होम बायर्स का पैसा वापस लौटाने के आदेश दे रही हैं, वहीं दूसरी ओर डेवलपर्स पर कर्ज का बोझ बढ़ता जा रहा है। हाल ही में जारी आंकड़ों के मुताबिक, देश की 14 लिस्‍टेड रियल एस्‍टेट कंपनियों की सालाना सेल्‍स के मुकाबले दोगुना कर्ज हो चुका है। ब्‍लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, 14 लिस्‍टेड कंपनियों की सालाना सेल्‍स 25,438 करोड़ रुपए है। वहीं, इन पर कर्ज 55,000 करोड़ रुपए से ज्‍यादा हो गया है। 

कोटक इंस्‍टीट्यूशनल इक्विटीज की रिपोर्ट के मुताबिक फाइनैंसियल ईयर 2016 में 14 लिस्‍टेड रियल एस्‍टेट कंपनियों का कुल डेट (कर्ज) 55,100 करोड़ रुपए तक पहुंच चुका है। इससे पहले फाइनैंसियल ईयर 2015 में इन कंपनियों का कुल डेट 50,800 करोड़ रुपए था, जो फाइनैंसियल ईयर 2014 में 41400 करोड़ रुपए था। एक्‍सपर्ट्स का कहना है कि डिलीवरी में देरी और सेल्‍स में गिरावट की वजह इन कंपनियों का कर्ज बढ़ता जा रहा है। कंपनियों की सेल्‍स का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि ब्‍लूमबर्ग की ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि इन लिस्‍टेड कंपनियों की सालाना सेल्‍स 25 हजार 438 करोड़ रुपए है। यानी, कुल कर्ज से लगभग आधी सेल्‍स हो रही है। 

रिपोर्ट के मुताबिक, डी.एल.एफ. पर सबसे अधिक 26 हजार 895 करोड़ रुपए कर्ज है। वहीं एक दूसरी रिपोर्ट के मुताबिक यूनिटेक का कुल कर्ज 7166 करोड़ रुपए, प्रेसटिज एस्‍टेट का कुल कर्ज 5112 करोड़ रुपए, इंडिया बुल्‍स रियल एस्‍टेट का 4617 करोड़ रुपए और एचडीआईएल का कर्ज 2730 करोड़ रुपए है। इनके अलावा पार्श्‍वनाथ, अंसल, गोदरेज, ओबरॉय रियल्‍टी, डीबी रियल्‍टी, सोभा डेवलपर्स, पुरावन्‍करा, नितेश एस्‍टेट, वासकॉन इंजीनियर्स और ओरबिट कॉरपोरेशन पर भी कर्ज है। 


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