‘सागरमाला परियोजना’ ने इस साल नहीं पकड़ी रफ्तार

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Sunday, December 31, 2017-12:29 PM

नई दिल्ली: जल परिवहन को बढ़ावा देने के लिए जलमार्गों तथा बंदरगाहों का ढांचा मजबूत बनाने की सरकार की महत्वाकांक्षी ‘सागरमाला’ परियोजना 2017 में रफ्तार नहीं पकड़ पायी। सरकार का दावा है कि इस परियोजना के तहत बंदरगाहरों के आधारभूत ढांच के विकास और क्षमता में बढोतरी पर विशेष ध्यान दिया गया है लेकिन इस साल इसका काम गति नहीं पकड़ पाया। 

समुद्री परिवहन की प्रबंधन और माल ढुलाई क्षमता को लेकर पिछले माह जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार देश के महत्वपूर्ण बंदरगाहों की माल ढुलाई की सालाना क्षमता 2016-17 के दौरान 1065.83 टन रही जो 2015-16 में 965.36 टन थी। इसी तरह से इन बंदरगाहों में यातायात प्रबंधन क्षमता 2015-16 के 606.37 टन के मुकाबले 2016-17 में बढकर 648.40 टन रही। 

दो साल पहले शुरू हुई थी योजना
केंद्र सरकार ने देश में जल परिवहन को बढ़ावा देने के लिए दो साल पहले यह महत्वाकांक्षी योजना शुरू की थी। इसका मकसद बंदरगाहों को आधुनिकरूप से विकसित कर, उनकी क्षमता बढाना तथा उन्हें रेल और सड़कों से इस तरह से जोडऩा है कि माल ढुलाई के लिए जलमार्गों का इस्तेमाल आसान हो। बंदरगाहों का आधारभूत ढांचा मजबूत बनाने की योजना के तहत इस साल 57 नयी परियोजनाओं को मंजूरी दी गयी। बंदरगाहों के विकास और उनकी क्षमता बढाने के लिए इस साल 57 परियोजनाओ को मंजूरी दी गयी। 

59 परियोजनाओ को मंजूरी देने का लक्ष्य 
परियोजनाओं में इस दौरान 9490.51 करोड़ रुपये का निवेश हुआ है जिसके कारण बंदरगाहों की क्षमता 102.52 टन बढ़ी। इस क्षमता को और बढ़ाने के लिए 2017-18 में 59 परियोजनाओ को मंजूरी देने का लक्ष्य है। सागरमाला के तहत अगले डेढ दशक में 91,434 करोड़ रुपये के निवेश से 142 पोत परियोजनाओ को विकसित करने की पहचान की जा चुकी है। बंदरगाहों और जलमार्गों के विकास के लिए पैसे की कमी नहीं हो इसके लिए केंद्रीय सडक निधि से 2.5 प्रतिशत की राशि आवंटित की जानी है। नौवहन और सड़क परिवहन तथा राजमार्ग मंत्रालय से इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गयी है और उसके बाद केन्द्रीय सड़क निधि अधिनियम 2000 में संशोधन किया गया। 

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