अब सोशल मीडिया से तय होगा कि आपको लोन मिलेगा या नहीं

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Monday, October 24, 2016-3:22 PM

नई दिल्लीः अब सोशल मीडिया पर किसी का पीछा करना या उसे ट्रोल करना आपको पर्सनल लोन मिलने के मौके कम करता है। साथ ही अगर आप किसी को ऑनलाइन स्पेस में परेशान करते हैं और आप लोन लेते हैं तो इससे ही यह तय होगा कि आपको मार्कीट रेट के मुकाबले कितना ज्यादा ब्याज देना पड़ेगा।

अब अगर आपको लोन लेना है तो सोशल मीडिया पर शिष्टाचार सीख लीजिए क्योंकि अब इसी से तय होगा कि आपको पर्सनल लोन पर 30 फीसदी ब्याज देना होगा या 9 फीसदी। इंस्टापैसा, गोपेसेंस, फेयरसेंट, कैशकेयर और वोटफॉरकैश जैसी नए समय की ऑनलाइन लोन देने वाली संस्थाएं और क्रेडिटमंत्री व बैंकबाजार.कॉम जैसे क्रेडिट मार्केटप्लेस लोन लेने वाले ग्राहकों की जानकारी के लिए केवल पेस्लिप या बैंक स्टेटमेंट तक सीमित नहीं हैं बल्कि यह आपके फोन लोकेशन डेटा, एसएमस और सोशल मीडिया पर आपके व्यवहार पर भी पैनी नजर बनाए रखती हैं। इनके पर्सनैलिटी स्कोर के आधार पर ही लोन लेने वाले की विश्वसनीयता को जांचा जाएगा। 

क्रेडिटमंत्री और बैंकबाजार.कॉम जैसी कंपनियां ग्राहकों को कम से कम ब्याज दर पर बैंक लोन दिलाने में मदद करती हैं। इंस्टापैसा के सीईओ निखिल सामा ने कहा, 'हम किसी व्यक्ति ने गूगल पर क्या सर्च किया या कौन सी वैबसाइट विजिट की, इसकी हिस्ट्री देख सकते हैं। इसके अलावा ट्विटर जैसी वैबसाइटों पर उनके चाल-चलन पर भी नजर रखी जाती है।' कैशई के फाऊंडर वी रमन कुमार ने कहा, 'लोन के लिए करने वाला बिना मकसद का जीवन जी रहा है, शराब पीकर गाड़ी चलाता है, जु्र खेलता है या ऐसे ही जोखिम वाले काम करता है या नहीं, इस सारे डेटा से इन सब बातों की जानकारी मिलती है। आजकल हम सूचनाओं के युग में जी रहे हैं इसलिए आपका सोशल मीडिया अकाउंट आपकी क्रे़डिट हिस्ट्री पर एक अमिट छाप छोड़ सकता है।'

ऐसी अनैलेसिस से वकील, फ्रीलांसर और कंसल्टेंट जैस लोग जिनको तनख्वाह नहीं मिलती है, उनकी जानकारी के लिए काफी महत्वपूर्ण है। बैंक ज्यादातर ऐसे लोगों को लोन देने में काफी सावधानी बरतते हैं। सामा कहते हैं, 'ऐसे लोगों के पास भारी भरकम अकाऊंट होने के बावजूद लेकिन हो सकता है कि तनख्वाह नहीं मिलने के कारण उन्हें लोन न मिले। इसलिए हम उनके मोबाइल यूसेज पैटर्न, जीपीएस लोकेशन और एसएमएस पर नजर रखते हैं। इसके अलावा हम उनके पैन डीटेल्स, आधार डेटाबेस, डेट ऑफ बर्थ और उनके रजिस्टर्ड मोबाइल फोन नंबर को भी वेरिफाइ कर सकते हैं।' केवल 1 से 7 दिन के भीतर लोन दिलाने वाली अर्लीसैलरी.कॉम जीपीएस लोकेशन, फेसबुक और लिंक्डइन के डेटा पर नजर रखता है। कंपनी के को-फाउंडर अक्षय मेहरोत्रा ने बताया, 'एक बार हमने दो बार के क्रेडिट कार्ड डिफॉल्टर का लोन ऐप्लीकेशन रिजेक्ट कर दिया। कुछ ही मिनट के भीतर उसकी गर्लफ्रेंड (जो कि फेसबुक से पता चला) ने उसी जीपीएस लोकेशन से लोन के लिए अप्लाई कर दिया। हमने यह भी देखा कि वह उस व्यक्ति के अकाउंट में समय समय पर अपने अकाउंट से पैसा ट्रांसफर किया करती थी।' ऑनलाइन लोन देने वाली कंपनियां आजकल लोन के लिए अप्लाई करने वाले के फेसबुक फॉलोअर और लिंक्डइन कनेक्शन पर भी नजर बनाए रखती हैं।

ग्राहकों की निजता के सवाल पर कैशकेयर के फाउंडर विकास शेखर ने बताया, 'ओला, ऊबर, स्विगी और अन्य मोबाइल ऐप की तरह हम लोग भी मोबाइल डेटा ऐक्सेस करने से पहले ग्राहक की इजाजत लेते हैं। साथ ही हम ग्राहक के निजी मैसेज पर कभी नजर नहीं रखते। इसके अलावा ग्राहकों का डेटा कहीं पर भी स्टोर नहीं किया जाता है, इसे केवल जरूरत होने पर ही इस्तेमाल किया जाता है।'


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