देश की पहली बुलेट ट्रेन की कहानी, जानिए क्या होगा खास?

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Thursday, September 14, 2017-10:56 AM

नई दिल्लीः नरेंद्र मोदी आज जापान के प्रधानमंत्री शिंजो अाबे के साथ गुजरात के अहमदाबाद में भारत की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना मुम्बई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल की आधारशिला रखेंगे। भारत की पहली बुलेट ट्रेन कब चलेगी, कितनी लागत आएगी, कितना निवेश होगा इन सबकी जानकारी निम्न है।

320 कि.मी. प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ेगी
इस ट्रेन का शुरूआत में बना डिजाइन ऐसा था कि इसकी स्पीड 250 कि.मी. प्रति घंटा थी। बाद में इसे इस तरह डिजाइन किया गया कि यह 350 कि.मी. प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ सकती थी लेकिन अब इसकी स्पीड 320 कि.मी. प्रति घंटा होगी। इस हाई स्पीड रेल लिंक के बीच की कुल दूरी 508 कि.मी. है। इसमें 351 कि.मी. का सफर गुजरात में और 155 कि.मी. का सफर महाराष्ट्र में है। इसमें 2 कि.मी. का ट्रैक केंद्र शासित प्रदेश दादर और नागर हवेली से भी होकर गुजरेगा।

2 घंटे 7 मिनट में अहमदाबाद से मुम्बई
अभी मुम्बई से अहमदाबाद की ट्रेन यात्रा में 7 से 8 घंटे का समय लगता है। हालांकि बुलेट ट्रेन की सहायता से यात्री यह दूरी 2 से 3 घंटे में ही तय कर लेंगे। यदि ट्रेन सिर्फ सिलैक्ट किए गए स्टेशन पर ही रुकती है तो यह दूरी सिर्फ 2 घंटे 7 मिनट में तय हो सकती है लेकिन सभी 12 स्टेशनों पर रुकने की वजह से इसमें 2 घंटे 58 मिनट का समय लगेगा।
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2022 तक होगी चालू 
साल 2015 में कैबिनेट से मंजूरी मिली थी। सरकार ने इससे पहले दिसम्बर, 2023 डैडलाइन तैयार की थी। हालांकि नए रेल मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को घोषणा की कि इस ट्रेन का चलन 15 अगस्त, 2022 तक शुरू हो जाएगा।

1.5 लाख करोड़ आएगी लागत
इस प्रोजैक्ट पर भारतीय रेलवे और जापान की फर्म शिंकासेन टैक्नोलॉजी संयुक्त रूप से काम कर रहे हैं। इसमें पहले रेल लिंक के लिए कुल अनुमानित खर्च 1.05 लाख करोड़ रुपए है। जापान भारत को सॉफ्ट लोन देने के लिए तैयार हो गया है जोकि पूरे प्रोजैक्ट का 81 प्रतिशत है। जापानी लोन भारत में 0.1 प्रतिशत के इंट्रस्ट पर दिया जा रहा है और भारत इसे 50 साल में देगा।

20 हजार लोगों को मिलेगी नौकरी
इस प्रोजैक्ट के कंस्ट्रक्शन में लगभग 20 हजार लोगों को नौकरी मिलेगी। इनका प्रयोग भविष्य में इसी तरह के प्रोजैक्ट में किया जा सकेगा। भारतीय रेलवे के तकरीबन 3 हजार कर्मचारियों को वर्तमान में जापान में प्रशिक्षित किया जा रहा है, वहीं लगभग 4 हजार लोग हाई स्पीड रेल ट्रेडिंग इंस्टीच्यूट वड़ोदरा में ट्रेनिंग ले रहे हैं।

क्या अन्य शहरों को भी मिलेगी बुलेट ट्रेन
एम.ए.एच.एस.आर. प्रोजैक्ट पर काम शुरू किया जा रहा है। सरकार अन्य 6 लिंक पर हाई स्पीड प्रोजैक्ट की संभावना को तलाश रही है। इनमें दिल्ली-मुम्बई, दिल्ली-कोलकाता, मुम्बई-चेन्नई, दिल्ली-चंडीगढ़, मुम्बई-नागपुर और दिल्ली-नागपुर में हाई स्पीड रेल लिंक शामिल हैं। 15 देशों में उपलब्ध यह ट्रेन विश्व की 10 सबसे तेज चलने वाली ट्रेनों में से एक होगी। बता दें कि सबसे तेज ट्रेन मैग्लेव है जोकि चीन के शंघाई में दौड़ती है। इसकी स्पीड 430 कि.मी. प्रति घंटा है।
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अन्य खासियतें
शुरू में होंगे 10 कोच लेकिन बाद में कोचों की संख्या होगी 16
700 लोगों के बैठने की होगी क्षमता
173  बड़े और 201 छोटे पुल बनेंगे
2700 से 3000 रुपए होगा किराए
36,000 लोग हर दिन करेंगे सफर
27 हाईवे 21 नदियों के ऊपर से गुजरेगी ट्रेन
7 कि.मी. रूट होगा समुद्र के अंदर
25 कि.मी. लम्बी सुरंग से भी गुजरेगी ट्रेन

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