80 रुपए प्रति किलो पहुंचे प्याज के दाम, दिसंबर में मिलेगी राहत

  • 80 रुपए प्रति किलो पहुंचे प्याज के दाम, दिसंबर में मिलेगी राहत
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Wednesday, November 29, 2017-4:23 PM

नई दिल्लीः प्याज आम से लेकर खास तक की रसोई का जायका है। मौजूदा हालातों में भी प्याज की कीमतों में तेजी है। इस समय दिल्ली के खुदरा बाजार में प्याज 60 से 80 रुपए प्रति किलोग्राम के ऊंचे भाव पर बिक रहा है। लेकिन प्याज की नई आवक बढ़ने पर अगले कुछ दिनों में प्याज सस्ता होने की संभावना है। सप्ताह भर में दिल्ली की मंडियों में प्याज के थोक भाव 10 रुपए, मुख्य उत्पादक महाराष्ट्र की मंडियों में 7 रुपए किलो तक बढ़ चुके हैं। हालांकि मंगलवार को थोक कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। पिछले साल के मुकाबले इस साल प्याज तीन गुना अधिक महंगा बिक रहा है। दिल्ली के अलावा अन्य महानगरों में भी प्याज 50 से 70 रुपए प्रति किलो पर बेचा जा रहा है।

प्याज की MEP तय
राष्ट्रीय बागवानी अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान (एन.एच.आर.डी.एफ.) के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि खरीफ वाले प्याज की बुआई कम हुई थी। इसके साथ ही बीते दिनों उत्पादक क्षेत्रों में बारिश से प्याज की आपूर्ति बाधित हुई है। इस समय मंडियों में प्याज की आवक 20 से 25 फीसदी कम हो रही है। इस वजह से बीते कुछ दिनों से प्याज के दाम बढ़ रहे हैं। चूंकि अब नई आवक शुरू हो चुकी है और अगले कुछ दिनों में यह जोर पकड़ने लगेगी और नई प्याज की गुणवत्ता भी अच्छी दिख रही है। सरकार ने निर्यात को हतोत्साहित करने के लिए न्यूनतम निर्यात मूल्य भी 850 डॉलर प्रति टन तय कर दिया है। ऐसे में जल्द ही प्याज के दाम सामान्य हो जाएंगे। अधिकारी ने कहा 15 दिसंबर तक प्याज के थोक 15-20 रुपए किलो के दायरे में आने की उम्मीद जताई।

दिसंबर में बड़ी मात्रा में होगी प्याज की आवक
हालांकि मंडी में प्याज की कीमतों में 2 से 3 रुपए किलो की गिरावट दर्ज की गई। अगले माह से गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश के साथ राजस्थान के अलवर से नए प्याज की आवक बड़ी मात्रा में होने लगेगी। जिससे अगले 15 से 20 दिनों में प्याज के दाम गिरकर सामान्य स्तर पर आने की संभावना है। उधर, केंद्र ने भारतीय धातु एवं खनिज व्यापार निगम (एम.एम.टी.सी.) को 2,000 टन प्याज आयात करने और अन्य एजेंसियों जैसे नेफेड और एसएफएसी को स्थानीय रूप से प्याज खरीदने और उपभोग के क्षेत्रों में आपूर्ति करने के लिए कहा है। चालू वित्त वर्ष के पहले चार महीने के दौरान बड़ी मात्रा में निर्यात से प्याज की आपूर्ति कम हुई है।

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