20 साल के निचले स्तर पर बैंक उधारी की रफ्तार

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Tuesday, July 25, 2017-11:51 AM

मुंबई,: सरकारी बैंकों की तरफ से वस्तुत: नया कर्ज नहीं दिए जाने के चलते बैंक की उधारी की रफ्तार 2016-17 में 20 साल के निचले स्तर पर आ गई। 32 सूचीबद्ध सरकारी व निजी बैंकों की संयुक्त उधारी साल 2016-17 के दौरान साल दर साल के हिसाब से महज 1.7 फीसदी बढ़ी। यह 1995-96 के बाद की सबसे सुस्त रफ्तार है। 2015-16 में उनकी उधारी में 6.8 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज हुई थी। वैयक्तिक बैंकों के 1995-96 से पहले के तुलनायोग्य आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं और सभी आंकड़े रुपए में हैं।

साल दर साल के हिसाब से उधारी में बढ़त की रफ्तार 73 फीसदी घटकर 2016-17 में 1.23 लाख करोड़ रुपए रह गई, जो 14 साल का निचला स्तर है। 2015-16 में उधारी 4.52 लाख करोड़ रुपए रही थी और 2013-14 में अपने सर्वोच्च स्तर पर 7.9 लाख करोड़ रुपए।
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लोनबुक में गिरावट दर्ज
कुल मिलाकर 21 सरकारी बैंकों में से 12 ने पिछले वित्त वर्ष में अपनी लोन बुक में गिरावट दर्ज की जबकि 2015-16 में सात ऐसे बैंक थे और 2013-14 में कोई बैंक ऐसा नहीं था। इसमें देश का सबसे बड़ा भारतीय स्टेट बैंक समूह स्तर पर शामिल है। लोनबुक में गिरावट दर्ज करने वाले अन्य पीएसयू बैंकों में सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, आईडीबीआई बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, देना बैंक, इलाहाबाद बैंक, इंडियन बैंक और यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया शामिल हैं। 21 सरकारी बैंकों की संयुक्त उधारी 2016-17 में 2.5 फीसदी घटी क्योंकि फंसे कर्ज के डर से इनमें से ज्यादातर बैंकों की लोन बुक सिकुड़ गई।

इक्विनॉमिक्स रिसर्च ऐंड एडवाइजरी के संस्थापक व प्रबंध निदेशक जी चोकालिंगम ने कहा कि फंसे कर्ज में इजाफे के डर से सरकारी बैंक अब नए कॉरपोरेट कर्ज देने के अनिच्छुक हैं। इसके अलावा सावधि कर्ज की मांग कम है क्योंकि काफी कम कंपनियां अभी बड़ा निवेश कर रही हैं। इसमें बढ़ोतरी मोटे तौर पर खुदरा क्षेत्र में हो रही है, जहां पी.एस.यू. बैंकों की कम मौजूदगी है। नमूने में शामिल सरकारी बैंकों की संयुक्त सावधि उधारी 2016-17 में 4 फीसदी कम रही जबकि एक साल पहले इसमें 2.7 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज हुई थी।
 


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