Yes bank ने नहीं माना RBI का आदेश, छुपाया एन.पी.ए

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Saturday, May 13, 2017-12:30 PM

नई दिल्लीः भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंकों को साफ-साफ आदेश दिया है कि वे अपनी कर्ज वाली संपत्तियों की गुणवत्ता का पूरा खुलासा अपने बहीखातों में करेंगे लेकिन ऐसा लगता है कि निजी क्षेत्र के बैंकों ने इस निर्देश की अनदेखी की और अपनी फंसी संपत्तियों को छिपाया। नए नियम के अनुसार बैंकों को रिजर्व बैंक द्वारा देखे गए फंसे कर्जों की संख्या अनिवार्य तौर पर बतानी होगी। हालांकि इसमें यह शर्त रखी गई है कि केंद्रीय बैंक के आकलन और बैंक की वास्तविक रिपोर्ट में 15 फीसदी से ज्यादा का अंतर होगा तो बैंकों को पूरा खुलासा करना होगा। 

फंसे कर्ज का आंकलन बताया गल्त
मार्च के अंत में क्यू.आई.पी. के जरिए पूंजी जुटाने वाले येस बैंक ने अपनी सालाना रिपोर्ट में बताया कि केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2015-16 के लिए उसका कुल फंसा कर्ज 5 फीसदी बताया था जबकि बैंक के अपने आकलन में यह 0.76 फीसदी था। शेयर बाजार में इस बैंक का शेयर 6 फीसदी की गिरावट के साथ बंद हुआ। प्रभुदास लीलाधर में बैंकिंग विश्लेषक प्रीतेश बंब ने कहा कि इससे बाजार को हैरानी हुई है। विश्लेषकों के अनुसार बैंकों के आंकड़ों का ऑडिट आमतौर पर चौथी तिमाही में होता है। लिहाजा पिछले वित्त वर्ष के आंकड़े अगले साल ही आएंगे। विश्लेषकों का यह भी कहना है कि यह रवैया सिर्फ एक बैंक तक सीमित नहीं है। मैक्वायरी रिसर्च ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि एन.पी.ए मसले से बैंकों में पारदर्शिता का सवाल भी खड़ा होता है। 

निफ्टी बैंक में भी आई गिरावट
येस बैंक ने एक बयान में कहा कि वित्त वर्ष 2016-17 में बैंक के उपायों के बाद एन.पी.ए. में कमी आई है और इस साल 31 मार्च तक यह 1039.9 करोड़ रुपए रह गया। इसमें भी एक बड़े कर्जदार के 911.5 करोड़ रुपए के ऋण शामिल हैं और जल्दी ही इसे वसूल कर लिया जाएगा। रिजर्व बैंक की समीक्षा के अनुसार बैंक के फंसे कर्ज 4,930 करोड़ रुपए के हैं जबकि वास्तव में उसने 750 करोड़ रुपए ही बताए हैं। इसका असर बैंकिंग शेयरों पर दिखा। येस बैंक 6 फीसदी गिरा और इसी के साथ निफ्टी बैंक में भी 500-600 अंकों की गिरावट आई। ऐक्सिस बैंक का शेयर 3 फीसदी और डी.सी.बी. बैंक का 2.7 फीसदी गिरा। आई.सी.आई.सी.आई. बैंक, पंजाब नैशनल बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के शेयरों में एक से दो फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।

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