42 करोड़ युवा क्या बदल पाएंगे संसद?

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Thursday, March 20, 2014-11:39 AM

चंडीगढ़: किसी दूसरे वर्ग (क्षेत्र, जाति, धर्म) की तरह युवा भी एकजुट होकर किसी पार्टी या प्रत्याशी को वोट नहीं देता। ऊपर से युवा जितना स्पष्ट मतदाता और वोटबैंक नजर आता है, वास्तव में वह ऐसा नहीं होता। उसका वोट भी परिवार, समाज और दूसरे हितों के आधार पर पड़ता है। इसके बावजूद युवाओं का एक बड़ा वर्ग हर चुनाव के साथ तैयार होता है, जो अपने भविष्य और मुद्दों के लिए काम करने वाली पार्टी और प्रत्याशी के नाम पर वोट करता है। इसी वोटर को अपने पाले में लाने का प्रयास सारी पार्टियां करती हैं।

 आखिर यंगिस्तान चाहता क्या है

युवाओं से जुड़ी दो महत्वपूर्ण बातें इस चुनाव में जरूर हैं - पहली, ‘आई हेट पॉलिटिक्स’ कहकर राजनीति से बचने वाले युवाओं का प्रतिशत घटा है। अब बड़ी तादाद में युवा मतदान को अपना कर्तव्य मानकर घर से बाहर निकलने लगे हैं। दूसरा, सोशल मीडिया ने राजनीतिक बहसों को युवाओं में लोकप्रिय बना दिया है। पिछले लोकसभा चुनावों में फेसबुक और ट्विटर की भूमिका न के बराबर थी लेकिन इस बार ये माध्यम चुनावों के केन्द्र में हैं, जिसका असर  नतीजों पर पड़ेगा।

 

सोशल मीडिया, युवाओं का पर्याय नहीं है लेकिन दोनों में से एक सध गया तो दूसरे को साधने में देर नहीं लगेगी। लगभग सवा अरब की आबादी वाले अपने देश में 42 करोड़, 20 लाख युवा हैं। यानी कुल आबादी का 34.8 फीसदी युवा हैं। 18-19 साल के सवा दो करोड़ से ज्यादा मतदाता इस चुनाव में पहली बार वोट डालेंगे। आकड़ों के मुताबिक 2014 के लोकसभा चुनाव के कुल 81 करोड़ वोटरों में 10 करोड़ नए वोटर जुड़ेंगे। युवाओं को दो चीजें सबसे पहले चाहिएं, बेहतर शिक्षा और शिक्षा के बाद रोजगार के बेहतर अवसर।


शिक्षा
देश में शिक्षा का स्तर बढऩे के बावजूद सारे युवा शिक्षित नहीं हैं। 15-34  आयु वर्ग के बीच का हर पांचवां युवा पढऩा-लिखना नहीं जानता। 62 फीसदी युवा मिडल स्कूल के  बाद पढ़ाई छोड़ देते हैं। शिक्षा के अलग-अलग स्तरों में पांच सालों में (2004-05 से लेकर 2009-2010) युवाओं की स्थिति में मामूली बदलाव देखने को मिले हैं।


शिक्षा का पैमाना
2004 - 05 2009 - 2010
साक्षर नहीं 26.0 18.2
स्कूल न जाने के बावजूद साक्षर 1.9     0.3
प्राइमरी स्कूल से नीचे के साक्षर 7.3 7.0
प्राइमरी स्कूल 14.3 13.8
मिडल स्कूल 21.5 21.9
सैकेंडरी स्कूल 13.4 17.6
हायर सैकेंडरी स्कूल 8.2 11.8
डिप्लोमा/सर्टिफिकेट कोर्स 1.4 1.3
ग्रैजुएट  4.8 6.4
पोस्ट ग्रैजुएट और उससे ऊपर 1.2 1.7


कामकाजी युवा
देश में काम करने वाले कुल कामकाजी लोगों का लगभग 50 फीसदी युवा हैं लेकिन उनमें जॉब के लिए जरूरी योग्यता और जॉब के अवसरों की कमी है। 15-34 आयु वर्ग का छोटा प्रतिशत ही ऐसा है जो श्रम के क्षेत्र में स्थापित है। स्कूलों के नामांकन बढऩे का फायदा यह है कि शुरुआती स्तर पर युवाओं को मौके तो मिलते हैं लेकिन 25-34 आयु वर्ग के बीच का बड़ा प्रतिशत ऐसा है, जिसके लिए जॉब नहीं है।

भविष्य में इन क्षेत्रों में होगी मांग (2022 में)

बुनियादी  ढांचा अनौपचारिक क्षेत्र(घरेलू मदद, ब्यूटीशियंस, गार्ड आदि) ऑटो और उससे जुड़े क्षेत्र बिल्डिंग और भवन निर्माण
कपड़ा और परिधान
10.3 .38 3.5 3.3 2.6

 


यातायात और सामान की व्यवस्था

संगठित फुटकर

रियल एस्टेट

शिक्षा और योग्यता विकास सेवाएं
अन्य
1.8 1.7 1.4 o.6 5.7

 

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