परमिसेबल लिमिट से बाहर पटाखे होंगे बैन

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Friday, October 13, 2017-10:38 AM

चंडीगढ़(विजय) : शहर में वायु और ध्वनि प्रदूषण को कंट्रोल में रखने के लिए अब चंडीगढ़ प्रशासन ने अपनी ओर से तैयारी तेज कर दी है। हालांकि इसका कितना फर्क पड़ेगा यह दीवाली के बाद आने वाले वायु और ध्वनि प्रदूषण के आंकड़े ही बताएंगे, लेकिन इससे पहले यू.टी. के डिपार्टमैंट ऑफ एनवायरमैंट ने डिप्टी कमिश्नर ऑफिस को मिनिस्ट्री ऑफ एनवायरमैंट फॉरैस्ट एंड क्लाइमेट चेंज की गाइडलाइंस को फोलो करने के लिए लेटर लिख दिया है। 

 

गौरतलब है कि पंजाब केसरी ने ‘चंडीगढ़ में 5 दिन चलेंगी ‘जहरीली’ हवांए’ शीर्षक से खबर प्रकाशित कर दीवाली के मौके पर होने वाले वायु और ध्वनि प्रदूषण के गंभीर मुद्दे को उठाया था। जिसके बाद एनवायरमैंट डिपार्टमैंट की ओर से डी.सी. ऑफिस को लेटर लिखकर परमिसेबल लिमिट से अधिक डेसिबल वाले पटाखे बेचने वाले दुकानदारों पर शिकंजा कसने के लिए कह दिया है। साऊंड पर्मिसेबल लिमिट 125 डेसिबल रखी गई है, लेकिन कहीं दीवाली पर शहर में ध्वनि प्रदूषण शहर के पर्यावरण को नुकसान न पहुंचाए इसके लिए प्रशासन शहर में बिक रहे हाई डेसिबल वाले पटाखों पर बैन लगाने की तैयारी में है। 

 

ये पटाखे बिक रहे खुलेआम :
हाईड्रो बंब (136 डेसिबल), हाईड्रोजन बंब (135 डेसिबल), टोपाज बंब (138 डेसिबल), क्लासिक बंब (138 डेसिबल), बुलेट बंब (136 डेसिबल), मिनी बंब (133 डेसिबल) और पैरट बंब (134 डेसिबल) वाले पटाखे आसानी से किसी भी दुकान में मिल रहे हैं।

 

95 प्रतिशत पटाखे साऊंड लिमिट से अधिक :
2015 में सैंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड और नैशनल फिजिकल लेब्रोटरी, दिल्ली द्वारा एक स्टडी की गई थी। जिसमें बताया गया था कि बाजारों में बिकने वाले 95 प्रतिशत पटाखे निर्धारित साऊंड लिमिट से अधिक पाए गए हैं। चैकिंग न होने की वजह से मार्कीट में ये पटाखे आसानी से मिल जाते हैं। डॉक्टर्स भी मानते हैं कि अधिक शोर करने वाले पटाखे बहरेपन और हाईपरटैंशन की वजह से बन सकते हैं। इसलिए ऐसे पटाखों पर बैन लगना चाहिए।

 

हर साल होते हैं दावे :
फैस्टीवल सीजन के दौरान ध्वनि प्रदूषण को कम करने के लिए प्रशासन द्वारा हर साल दावे किए जाते हैं, लेकिन हकीकत में साल दर साल ऐसे पटाखों की संख्या बढ़ती जा रही है जिनसे सारे नियम धरे के धरे रह जाते हैं। प्रशासन द्वारा भी अब दीवाली के मौके पर केवल स्कूल तक ही ऐसे अभियान सीमित रखे जाते हैं जहां स्टूडैंट्स से रैलियां करवाकर लोगों तक क्रैकर फ्री दीवाली मनाने के संदेश पहुंचाए जाते हैं, लेकिन बाजारों में किसी भी प्रकार की दबिश नहीं की जाती है जहां इनकी सेल हो रही है।

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