चाणक्य नीति: न लें ऐसे व्यक्ति का आश्रय, झेलना पड़ सकता है दुख

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Sunday, October 02, 2016-4:41 PM

आचार्य चाणक्य का जन्म करीब 300 ईसा पूर्व में हुआ माना जाता है। महान राजनीतिज्ञ अौर कुटनीतिज्ञ होने के साथ-साथ इन्होंने मौर्य साम्राज्य की स्थापना व चन्द्रगुप्त मौर्य को सम्राट बनाने में अहम भूमिका निभाई थी। पाटलिपुत्र से संबंध होने के कारण उसे इन्होंने अपनी कर्मभूमि बनाया। आचार्य चाणक्य ने अपने जीवन के अनुभवों को चाणक्य नीति के द्वारा लोगों तक पहुंचाया। चाणक्य नीति की ज्यादातर बातें सिर्फ आदर्श से प्रभावित नहीं हैं, उनमें यथार्थ की स्पष्ट झलक है। इन नीतियों का पालन करने से हम कई परेशानियों से बच सकते हैं। चाणक्य के अनुसार जो व्यक्ति दुर्बल होता है उसका आश्रय लेने से दुख झेलना पड़ता है।

आचार्य चाणक्य कहते हैं कि-

 

दुर्बलाश्रयो दु:खमावहति।

 

अर्थात: यदि कोई राजा दुर्बल राजा का आश्रय लेता है तो वह कभी सुखी नहीं रह पाता। यह कहावत भी है-‘कमजोर की दोस्ती जी का जंजाल’।


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