दूसरों का अनुकरण करने से पूर्व रखें चाणक्य की इस बात का ध्यान

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Sunday, October 23, 2016-4:20 PM

चाणक्य महान विद्वानों की श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ स्थान रखते हैं। उन्होंने मौर्य साम्राज्य की स्थापना करके अखण्ड भारत का निर्माण किया था। आचार्य चाणक्य एक बड़े दूरदर्शी विद्वान थे। चाणक्य जैसे बुद्धिमान, रणनीतिज्ञ, चरित्रवान व राष्ट्रहित के प्रति समर्पित भाव वाले व्यक्ति भारत के इतिहास में ढूंढने से भी बहुत कम मिलते हैं। इनकी नीतियों में उत्तम जीवन का निर्वाह करने के बहुत से रहस्य समाहित हैं, जो आज भी उतने ही कारगर सिद्ध होते हैं। जितने कल थे। इन नीतियों को अपने जीवन में अपनाने से बहुत सारी समस्याओं से बचा जा सकता है और साथ ही, उज्जवल भविष्य का निर्माण किया जा सकता है। चाणक्य के अनुसार व्यक्ति जब तक अमुक देव या राजा समान न हो जाए तब तक नकल नहीं करनी चाहिए। 

 

न देवचरितं चरेत्। 

 

भावार्थ: देवता के चरित्र के अनुकरण से यही तात्पर्य है कि जब तक व्यक्ति अपने आपको अमुक देवता अथवा राजा के अनुरूप न बना ले तब तक उसका अनुकरण नहीं करना चाहिए। इस प्रकार के कपड़े पहन कर वह नाटक मंडली का कोई नट ही लग सकता है।
 


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