लोगों को लुभा रहे हैं भारतीय स्वर्ण सिक्के

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Thursday, October 13, 2016-3:25 PM

नई दिल्ली: भारत सरकार की महात्वाकांक्षी स्वर्ण मौद्रीकरण योजना के तहत पेश सोने के सिक्के ‘इंडियन गोल्ड क्वॉयन’ को शुद्धता और विश्वसनीयता के कारण उपभोक्ता दूसरे स्वर्ण सिक्कों से अधिक पसंद कर रहे हैं। कीमती धातुओं का कारोबार करने वाली सरकारी कंपनी एमएमटीसी लिमिटेड तथा विश्व स्वर्ण परिषद द्वारा किए गए अध्ययन में यह बात समाने आयी है। परिषद द्वारा आज जारी रिपोर्ट ‘इंडियाज गोल्ड इंवेस्टमेंट इवॉल्यूशन, इंडियन गोल्ड क्वॉयन: ऐन इंट्रोडक्शन टू ब्रांडेड गोल्ड क्वॉयंस’ में कहा गया है भारतीय स्वर्ण सिक्कों की मांग लगातार बढ़ती जा रही है। उसने कहा कि सरकार द्वारा प्रायोजित होने की वजह से इसकी शुद्धता, विश्वसनीयता तथा मानक के अनुरूप होना इसका सबसे बड़ा कारण है।

परिषद ने कहा कि त्योहारी मौसम में खासकर दीपावली में उपहार के तौर पर सोने के सिक्के देने के प्रचलन के कारण इसकी बिक्री बढ रही है। ऐसे में बैंकों जैसे विश्वसनीय श्रोत के जरिए बिक्री के लिए उपलब्ध सिक्के उपभोक्ताओं की पसंद बनते जा रहे हैं। उपभोक्ता दो ग्राम, पांच ग्राम और दस ग्राम के सिक्कों को विशेष तरजीह दे रहे हैं। भारतीय स्वर्ण सिक्कों की बिक्री के लिए अभी इंडियन ओवरसीज बैंक, फेडरल बैंक, बिजया बैंक और येस बैंक की चुनिंदा शाखाएं अधिकृत हैं।

एमएमटीसी के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक वेद प्रकाश ने कहा कि हमने लॉचिंग के बाद अबतक 185 किलोग्राम भारतीय स्वर्ण सिक्के बेच चुके हैं। शोध से इसके प्रति उपभोक्ताओं की दिलचस्पी का भी पता चलता है। सरकार द्वारा प्रायोजित होने के कारण इसकी गुणवत्ता विश्वसनीय है। एमएमटीसी के आउटलेटों के अलावा ये सिक्के चार बैंकों की शाखाओं पर भी उपलब्ध हैं। अभी करीब 200 शाखाएँ परिचालन में हैं और हमारा लक्ष्य इनकी संख्या बढ़ाना है। विश्व स्वर्ण परिषद के प्रबंध निदेशक (भारत) सोमसुंदरम पीआर ने कहा कि वितरण विस्तृत होने से इन सिक्कों की मांग और बढ़ेगी तथा यह स्वर्ण निवेश का पसंदीदा जरिया बन जाएगा। यह अंतर्राष्ट्रीय बास्केट में राष्ट्रीय स्वर्ण सिक्कों की कमी को भी पूरा करता है।


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