मैडीकल रॉ मैटीरियल: चीन पर डिपैंड नहीं रहना चाहती सरकार

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Friday, October 21, 2016-12:13 PM

नई दिल्ली: देश में बन रहीं एंटीबायोटिक एवं अन्य महत्वपूर्ण मैडीसंस के लिए 65 प्रतिशत रॉ मैटीरियल चीन से आ रहा है। इस पर लंबे समय से चिंता जताई जा रही है लेकिन चीन पर निर्भरता कैसे कम की जाए इसका कोई उपाय सरकार नहीं खोज पाई है। इस मुद्दे का सैल्यूशन ढूंढने के लिए देश के दवा नियंत्रक कार्यालय ने थोक दवा निर्माताओं की बैठक बुलाने का फैसला किया है। बैठक की तारीख तय नहीं है लेकिन यह इस महीने के अंत या अगले महीने में हो सकती है। एंटीबायोटिक, मधुमेह, कैंसर आदि की दवाओं के लिए 65 प्रतिशत कच्चा माल सिर्फ चीन से आ रहा है जबकि करीब 20 प्रतिशत यूरोपीय देशों से आता है। भारतीय थोक दवा निर्माता चीन से रॉ मैटीरियल इसीलिए खरीद रहे हैं क्योंकि वह भारतीय बाजार से 4 गुना तक सस्ता है। दूसरे भारत की तरफ से इस पर इम्पोर्ट ड्यूटी नगण्य है। दवा नियंत्रक जी.एन. सिंह ने कहा कि उन्होंने इस मुद्दे पर दवा उत्पादकों के साथ डिस्कशन करने के लिए बैठक बुलाने का फैसला किया है।

चीनी सामान के खिलाफ मुहिम से नया पेंच:
वैसे तो दवाओं के रॉ मैटीरियल के लिए चीन पर निर्भरता पर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल भी पूर्व में चिंता जता चुके हैं लेकिन इधर, देश में चीन निर्मित सामानों के विरोध की मुहिम छिडऩे से इसमें नया मोड़ आने की आशंका है। विरोध की यह लहर अगर ज्यादा फैली तो इससे दवा निर्माण भी प्रभावित हो सकता है।

असल चिंता
दवा नियंत्रण कार्यालय के सूत्रों के अनुसार जो रॉ मैटीरियल चीन से आ रहा है वह भारत में भी बन सकता है लेकिन इसके लिए आवश्यक तैयारियां करनी होगी। देश के कई हिस्सों में इसके लिए विशेष पार्क स्थापित करने की योजना है। पर इसमें अभी समय लगेगा। दवा नियंत्रण कार्यालय के अनुसार इससे भी बड़ी चिंता की बात यह है कि यदि चीनी रॉ मैटीरियल बंद कर दिया गया और अन्य देशों या देश में निर्मित रॉ मैटीरियल ही लिया गया तो इससे दवाओं की कीमतें काफी बढ़ सकती हैं।


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