श्री राम दरबार की छवि को देखें तो लक्ष्मण जी के हाथ में दण्ड है, श्री शत्रुघ्न चंवर डुला रहे हैं। जगदम्बा जी वाम अंग में शोभित हैं। श्री हनुमान चरणों की सेवा में हैं।
यन्मूले सर्व तीर्थानि पत्रग्रे सर्व देवता। यन्मध्ये सर्व वेदाश्च तुलसी तां नमाम्यहम।। मैं उस तुलसी को नमस्कार करता हूं जिसके मूल में सभी तीर्थ स्थान हैं
शास्त्रों में कहा गया है- हरेर्नाम हरेर्नाम हरेर्नाम केवलम। कलौ नास्त्येव नास्त्येव नास्त्येव गतिरन्यथा।।
जीवन में आ रही दिनोंदिन मानसिक अशांति, क्रोध, शांति प्राप्ति एवं अमृत्व के लिए श्रीमद्भगवद् गीता के चौदहवें अध्याय के इस श्लोक का विशेषकर वैशाख व ज्येष्ठ मास
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में सवा दो करोड़ रुपए की लागत से निर्मित विश्व की सबसे ऊंची 121 फुट की भगवान कृष्ण की प्रतिमा आगामी नौ मई को यदुकुल सम्मेलन के अवसर पर यहां स्थापित की जाएगी। इस समय सबसे ऊंची भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा 53 फुट की दिल्ली में...