बिल्ववृक्ष की महिमा, मिल सकता है भगवान शंकर के दर्शनों का सौभाग्य

Edited By ,Updated: 23 Jul, 2016 09:51 AM

belpatra vriksh

सावन महीने में शिवलिंग पर बेल पत्र अर्पित किए जाते हैं क्योंकि ये भोलेनाथ को प्रिय लगते हैं। शिवलिंग पर तीन पत्तियों वाला बेल पत्र अर्पित

सावन महीने में शिवलिंग पर बेल पत्र अर्पित किए जाते हैं क्योंकि ये भोलेनाथ को प्रिय लगते हैं। शिवलिंग पर तीन पत्तियों वाला बेल पत्र अर्पित किया जाता है यदि चार, पांच, छ: या सात पत्ते हों तो अति शुभ माना जाता है। शिवपूजन में बेल पत्र का बहुत महत्व है क्योंकि माना जाता है कि इनके बिना शिव की उपासना पूरी नहीं होती। बिल्व पत्र में औषधीय गुण भी होते हैं। यह वृक्ष बहुत शुभ माना जाता है। आइए जानें इसके गुणों के बारें में-

 

* जहां बिल्व का पेड़ होता है वहां उसके समीप सांप नहीं आते।

 

* शवयात्रा ले जाते समय उस पर बिल्व के पेड़ की छाया पड़े तो मरने वाले को मोक्ष की प्राप्ति होती है। 

 

* बिल्व वृक्ष में वायुमंडल में मौजूद अशुद्धियों को सोखने की सबसे अधिक योग्यता होती है।

 

* किसी को चार, पांच, छ: या सात पत्तों वाला बेल पत्र मिले तो वह भाग्यवान होता है अौर इसे भोलेनाथ को अर्पित करने से कई गुणा फल की प्राप्ति होती है।


* बिल्व के पेड़ को काटने से वंश का नाश होता है अौर इसका वृक्ष लगाने से वंश की वृद्धि होती है।

 

* सुबह-शाम को बिल्व के पेड़ के सिर्फ दर्शन से ही पापों का अंत हो जाता है।


* बिल्व के पेड़ की सिंचाई करने से पितर तृप्त हो जाते हैं।

 

* बिल्व के पेड़ और सफेद आक को जोड़े से लगाने पर घर में लक्ष्मी स्थिर रहती हैं।

 

* शिवलिंग पर एक बार या भूल से भी बेल पत्र अर्पित करने से सारे पापों का नाश हो जाता है।

 

* माना जाता है कि बेल वृक्ष का रोपण, पोषण और संवर्धन करने से भगवान शंकर के दर्शन करने का सौभाग्य मिलता है।

 

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