बुरा समय दूर होगा, मन से हैं परेशान अवश्य पढ़ें...

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Friday, October 21, 2016-12:54 PM

दान का मतलब होता है त्याग देना। उनको छोड़ देना जो आपके लिए रुकावट बन रहे हैं। वे विचार जो आपको समानता जैसे राजसी सिंहासन पर आसीन नहीं होने दे रहे उनको छोड़ देना। इसका मतलब है वे बातें जो आपके मन को दुख पहुंचाने वाली हैं, समस्याएं और परेशान करने वाली हैं, उन बातों को छोड़ देना, मन कहता है ‘यह आपने अच्छा किया’ तो आप खुशी से उछलने लगते हैं और जब मन कहता है ‘यह गलत हो गया’ तो आप नीचे बैठ जाते हैं।


बुरा वक्त आपको पीड़ा देता है लेकिन यह हमेशा नहीं रहता। अच्छा वक्त आपको सुखद अनुभव देता है लेकिन कुछ समय बाद यह गायब हो जाता है। हर काम और उसका फल खत्म हो जाता है। यह हमेशा नहीं रहने वाला। दान का मतलब है देना। इसमें क्षमा भी शामिल है। जब आपका मन इधर-उधर भागे तो उसे भागने दें। इसे पकड़ कर मत बैठो। इसके पीछे जाओ और इसे वापस लाओ।


ऐसा मत कहो कि मैं अपने मन से परेशान हो गया हूं, थक गया हूं। इसमें ईर्ष्या छुपी है और ऐसा करना गलत है। अपने मन से घृणा मत करो। अपने मन को क्षमा कर दो। ऐसा कहो कि अज्ञानता से मेरा मन इन मूर्ख विषयों के पीछे भागता है। तब आपका अपने मन से झगड़ा खत्म हो जाएगा। अब हम भेद की नीति को जानें। तुलना करना, काम की चीजों से बिना काम की चीजों की तुलना करना। यह शरीर एक खाली खोल की तरह है। जब आप अपने शरीर को देखते हैं तो कभी सुखद तरंगें और कभी दुखद कंपन उठने लगते हैं। 


जैसे ही उन्हें आप देखते हैं तो वे खत्म हो जाते हैं। आपके कण-कण से ऊर्जा उठने लगती है। जब आप इसे देखते हैं तो ऊर्जा समानता से बहने लगती है। एक संतुलन बना देती है और आपको अनुभव होता है कि यह शरीर या कोरा स्पंदन ही सब कुछ नहीं है। शरीर से बहुत आगे और परे भी बहुत कुछ है। उस चेतना से जुड़े रहें जो अपने चारों ओर तथा विश्व ब्रह्मांड में फैली हुई है।
 


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