काल भैरव जंयती: महादेव के रौद्ररूप भैरव पूजन से शत्रुओं का होगा नाश

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Thursday, November 09, 2017-9:09 AM

कल शुक्रवार दि॰ 10.11.17 को मार्गशीर्ष कृष्ण के उपलक्ष्य में काल भैरव जयंती पर्व मनाया जाएगा। शिव पुराण के अनुसार इसी दिन महादेव अपने रुद्रावतार भैरव के रूप में प्रकट हुए थे। पौराणिक मतानुसार अंधकासुर दैत्य अपनी अनीति व अत्याचार की सीमाएं पार करते हुए महादेव पर आक्रमण करने का दुस्साहस कर बैठा, तब उसके संहार के लिए भगवान शंकर के रुधिर से भैरव की उत्पत्ति हुई। मृत्यु को भयभीत करने वाले काल भैरव का रंग कोलतार से भी गहरा है। विशाल प्रलंब, स्थूल शरीर, अंगारकाय त्रिनेत्र, काले डरावने चोगेनुमा वस्त्र, रूद्राक्ष की कण्ठमाला, हाथों में लोहे का भयानक दण्ड व काले कुत्ते की सवारी है।

 

 

कालिका पुराण अनुसार शिव के गण भैरव के 64 भेद हैं तथा यह आठ भागों में विभक्त हैं। ब्रह्मवैवर्तपुराण अनुसार महाभैरव, संहार, असितांग, रुद्र, कालभैरव, क्रोध, ताम्रचूड़, चंद्रचूड़ भैरव नामक आठ पूज्य भैरवों का निर्देश है। शिवमहापुराण में भैरव को परमात्मा शंकर का ही पूर्णरूप बताया गया है। काल भैरव जयंती के विशेष पूजन व्रत और अनुष्ठान से व्यक्ति भय से मुक्ति हो जाता है, सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है तथा सभी शत्रुओं का नाश होता है। 

 

 

पूजन विधि: पूर्वमुखी होकर काल भैरव का दशोपचार पूजन करें। तिल के तेल का दीप करें, लोहबान की धूप करें, बरगद का पत्ता चढ़ाएं, सिंदूर व काजल चढ़ाएं, जलेबी का भोग लगाएं तथा इस विशेष मंत्र से का 1 माला जाप करें। पूजन के बाद भोग कुत्ते को खिला दें।

 

पूजन मुहूर्त: शाम 16:44 से शाम 17:44 तक। (संध्या मुहूर्त)

 

पूजन मंत्र: ह्रीं काल भैरवाय नमः॥

 


उपाय
भय से मुक्ति हेतु नारियल सिर से 8 बार वारकर भैरव जी पर चढ़ाएं।
 

पारिवारिक कष्टों से मुक्ति हेतु कालभैरव पर चढ़े उड़द भैंस को खिलाएं।


शत्रु नाश हेतु भैरव जी के समक्ष शत्रुओं का नाम लेते हुए राई कर्पूर से जलाएं।


आचार्य कमल नंदलाल
ईमेल: kamal.nandlal@gmail.com

Edited by:Aacharya Kamal Nandlal
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