मृत्यु के पश्चात आत्मा को स्वर्ग में प्रवेश करवाने के लिए अपनाया जाता था ये मार्ग

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Friday, February 17, 2017-9:29 AM

महात्मा बुद्ध के समय की बात है। उन दिनों मृत्यु के पश्चात आत्मा को स्वर्ग में प्रवेश करवाने के लिए कुछ विशेष कर्मकांड करवाए जाते थे। होता यह था कि एक घड़े में कुछ छोटे-छोटे पत्थर डाल दिए जाते और पूजा-हवन इत्यादि करने के बाद उस पर किसी धातु से चोट की जाती। अगर घड़ा फूट जाता और पत्थर निकल जाते तो उसे इस बात का संकेत समझा जाता कि आत्मा अपने पाप से मुक्त हो गई है और उसे स्वर्ग में स्थान मिल गया है।


चूंकि घड़ा मिट्टी का होता था इसलिए इस प्रक्रिया में हमेशा ही घड़ा फूट जाता और आत्मा स्वर्ग को प्राप्त हो जाती। अपने पिता की मृत्यु के बाद एक युवक ने सोचा क्यों न आत्मा-शुद्धि के लिए महात्मा बुद्ध की मदद ली जाए, वह अवश्य ही आत्मा को स्वर्ग दिलाने का कोई और बेहतर व निश्चित रास्ता जानते होंगे। इसी सोच के साथ वह महात्मा बुद्ध के समक्ष पहुंचा। 


उसने कहा, ‘‘हे महात्मन, मेरे पिता जी नहीं रहे, कृपया आप कोई ऐसा उपाय बताएं कि यह सुनिश्चित हो सके कि उनकी आत्मा को स्वर्ग में ही स्थान मिले।’’


बुद्ध बोले, ‘‘ठीक है, जैसा मैं कहता हूं वैसा करना। तुम 2 घड़े लेकर आना। एक में पत्थर और दूसरे में घी भर देना। दोनों घड़ों को नदी पर लेकर जाना और उन्हें इतना डुबोना कि बस उनका ऊपरी भाग ही दिखे। धातु से बनी हथौड़ी से उन पर नीचे से चोट करना और ये सब करने के बाद मुझे बताना कि क्या देखा?’’


युवक बहुत खुश था, उसे लगा कि बुद्ध द्वारा बताई गई इस प्रक्रिया से निश्चित ही उसके पिता के सब पाप कट जाएंगे और उनकी आत्मा को स्वर्ग की प्राप्ति होगी। अगले दिन युवक ने ठीक वैसा ही किया और सब करने के बाद वह बुद्ध के समक्ष उपस्थित हुआ।
बुद्ध ने पूछा, ‘‘आओ पुत्र, बताओ तुमने क्या देखा?’’


युवक बोला, ‘‘मैंने आपके कहे अनुसार पत्थर और घी से भरे घड़ों को पानी में डाल कर चोट की। जैसे ही मैंने पत्थर वाले घड़े पर प्रहार किया घड़ा टूट गया और पत्थर पानी में डूब गए। उसके बाद मैंने घी वाले घड़े पर वार किया, वह घड़ा भी तत्काल फूट गया और घी नदी के बहाव की दिशा में बहने लगा।’’ 


बुद्ध बोले, ‘‘ठीक है, अब जाओ और पुरोहितों से कहो कि कोई ऐसी पूजा, यज्ञ इत्यादि करें कि वे पत्थर पानी के ऊपर तैरने लगें और घी नदी की सतह पर जाकर बैठ जाए।’’ 


युवक हैरान होते हुए बोला, ‘‘आप कैसी बात करते हैं? पुरोहित चाहे कितनी भी पूजा करवा लें, पत्थर कभी पानी पर नहीं तैर सकता और घी कभी नदी की सतह पर जाकर नहीं बैठ सकता।’’


बुद्ध बोले, ‘‘बिल्कुल सही और ठीक ऐसा ही तुम्हारे पिता जी के साथ है। उन्होंने अपने जीवन में जो भी अच्छे कर्म किए हैं, वे उन्हें स्वर्ग की तरफ उठाएंगे और जो भी बुरे कर्म किए हैं, वे उन्हें नरक की ओर खींचेंगे। तुम चाहे जितनी भी पूजा करवा लो, कर्मकांड करवा लो, तुम उनके कर्मफल को रत्ती भर भी नहीं बदल सकते।’’

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