देवी सती के इस मंदिर में भक्तों से पहले पशु-पक्षियों में बंटता है प्रसाद

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Wednesday, January 10, 2018-2:09 PM

विश्वभर में एेसे कई मंदिर हैं जो अपनी विभिन्न विशेषताओं के कारण बेहद प्रसिद्ध हैं। एेसा ही एक मंदिर उत्तर प्रदेश में बलरामपुर के तुलसीपुर क्षेत्र में स्थित है जो देश की इक्यावन शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। ये मंदिर देवी पाटन मंदिर के नाम से जाना जाता है। यहां देवी सती को मां पाटेश्वरी के रूप में पूजा जाता है। इस मंदिर की विशेष बात ये है कि यहां पशु-पक्षियों को प्रसाद खिलाने के बाद ही प्रसाद भक्तों में वितरण किया जाता है। यहां के लोगों का मानना है कि ईश्वर का वास मनुष्य ही नहीं अपितु पशु-पक्षियों के संग कण-कण में होता है। 

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मान्यता
मंदिर के महंत मिथलेशनाथ योगी के अनुसार मंदिर में मां भगवती को भोग लगाने के बाद चील, कौवे, बाज, कबूतर, चिडिय़ा, गौरैया, गौ, कुत्ते तथा अन्य नाना प्रकार के खग विहग पशु-पक्षियों को परंपरागत भोजन कराया जाता है। मंदिर परिसर में जैसे ही घंटा घड़ियाल बजना आरंभ होता है, इधर-उधर अन्य स्थानों से उड़ान भर पक्षियों का झुंड मंदिर में भोजन के लिए एकत्र हो जाता है। इतना ही, नहीं पशु-पक्षी भी सती माता को चढ़ाए प्रसाद को भोजन के रूप में झुंड में ग्रहण कर मनमोहक चहचहाहट के संग अठखेलियों को प्रस्तुत कर मां के भक्तों का मन मोहते हैं। मंदिर परिसर में लगे प्राचीन बरगद के पेड़ों पर हजारों की संख्या में चमगादडों का वास है जिनको दूर-दराज से आए देवीभक्त देर-देर तक निहार कर उनकी हरकतों को देखकर प्रसन्न होते हैं। उन्होंने बताया कि संसार की रचना में प्रकृति, मानव तथा पशु- पक्षियों का महत्वपूर्ण योगदान है।

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सूबे के मुखिया मुख्यमंत्री गौरक्षपीठाधीश्वर महंत योगी आदित्यनाथ देवी पाटन मंदिर के मुख्य संरक्षक हैं। श्री योगी का गौ तथा अन्य पशुओं से प्रेम जगजाहिर हैं। इस कारण मंदिर परिसर में गौशाला के अतिरिक्त घोंसले, पिंजड़े, घरौंदे तथा अन्य जानवरों के शरणालय बने हैं। नाथ संप्रदाय के देश-विदेश से आने वाले अनुयायी पालतू पशुओं की सेवादारी कर पुण्य कमाते हैं। हाल ही में मुख्यमंत्री श्री योगी ने देवीपाटन मन्दिर को शीघ्र ही पर्यटन स्थल घोषित करने का ऐलान किया है।
 

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