ईश्वर को कौन प्रकाश देता है?

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Sunday, August 18, 2013-12:06 PM

दीपक के प्रकाश में चाहे कोई भागवत पाठ करें या चोरी। दीपक के मन में न तो किसी के प्रति सुभाव होगा न तो कुभाव । दीपक का धर्म तो एक ही है प्रकाशित होना,प्रकाश देना। प्रकाश का किसी के कर्म के साथ कोई सम्बन्ध नहीं है।

परमात्मा सभी के हृदय मे बसकर दीपक की तरह प्रकाश देते हैं। जीव के पाप या पुण्य कर्म का साक्षीभूत परमात्मा पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। ईश्वर आनन्दरुप हैं सर्वव्यापी हैं। ईश्वर ही बुद्धि को प्रकाशित करते हैं। ईश्वर को प्रकाश देने वाला कोई नहीं हैं वह स्वयंप्रकाशी है।

ईश्वर के सिवाय अन्य सभी पर प्रकाशी है। ईश्वर का दीपक सा यह स्वरुप हमें प्रकाश देता है इस स्वरुप का अनुभव करने हेतु ज्ञानी पुरुष ब्रह्माकार वृत्ति धारण करते हैं। मन से ईश्वर का सतत् चिन्तन करें ईश्वर को छोड़कर मनोवृत्ति को जहां भी रखा जायेगा वह स्थान उसमें समा नहीं पायेगा ईश्वर के अतिरिक्त सभी कुछ अल्प है। अत: अन्य किसी भी वृत्ति प्रवृत्ति में मनोवृत्ति को शान्ति नहीं मिलेगी जब वृत्ति कृष्णाकार , ब्रह्माकार , भगवतस्वरुप बनेगी तभी आनन्द की प्राप्ति होगी।

                                                                                               -भागवत आचार्य श्री रवि नंदन शास्त्री जी  महाराज जी


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