उसी क्षण सारे रहस्य खुल जाते हैं

  • उसी क्षण सारे रहस्य खुल जाते हैं
You Are HereDharm
Wednesday, September 04, 2013-1:28 PM

जीवन में कोई रहस्य है ही नहीं, या तुम कह सकते हो कि जीवन खुला रहस्य है। सब कुछ उपलब्ध है, कुछ भी छिपा नहीं है। तुम्हारे पास देखने की आंख भर होनी चाहिए। यह ऐसा ही है जैसा कि अंधा आदमी पूछे कि ‘मैं प्रकाश के रहस्य जानना चाहता हूं।’

उसे इतना ही चाहिए कि वह अपनी आंखों का इलाज करवाए ताकि वह प्रकाश देख सके। प्रकाश उपलब्ध है, यह रहस्य नहीं है लेकिन वह अंधा है उसके लिए कोई प्रकाश नहीं है। प्रकाश के बारे में क्या कहें? उसके लिए तो अंधेरा भी नहीं है क्योंकि अंधेरे को देखने के लिए भी आंखों की जरूरत होती है।

एक अंधा आदमी अंधेरा नहीं देख सकता। यदि तुम अंधेरा देख सकते हो तो तुम प्रकाश भी देख सकते हो। यह एक सिक्के के दो पहलू हैं। अंधा आदमी न तो अंधेरे के बारे में कुछ जानता है, न ही प्रकाश के बारे में। अब वह प्रकाश के रहस्य जानना चाहता है।अब हम उसकी मदद कर सकते हैं उसकी आंखों का आप्रेशन करके।

प्रकाश के बारे में बड़ी-बड़ी बातें कह कर नहीं वे अर्थहीन होंगी। जिस क्षण अहंकार विदा हो जाता है, उसी क्षण सारे रहस्य खुल जाते हैं। जीवन बंद मुट्ठी की तरह नहीं है, यह तो खुला हाथ है। लेकिन लोग इस बात का मजा लेते हैं कि जीवन एक रहस्य है छुपा रहस्य।

अपने अंधेपन को छुपाने के लिए उन्होंने यह तरीका निकाला है कि छुपे रहस्य हैं कि गुह्य रहस्य हैं, जो सभी के लिए उपलब्ध नहीं हैं या वही महान लोग इन्हें जान सकते हैं जो तिब्बत में या हिमालय में रहते हैं, या वे जो अपने शरीर में नहीं हैं, जो अपने सूक्ष्म शरीर में रहते हैं और अपने चुने हुए लोगों को ही दिखाई देते हैं।


विवाह प्रस्ताव की तलाश कर रहे हैं ? भारत मैट्रीमोनी में  निःशुल्क  रजिस्टर  करें !

Recommended For You