धन का उपयोग 3 तरह करने से.....

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Saturday, September 07, 2013-7:12 AM

मां कैसी है? श्रीसूक्त में इसे सुवर्णा कहा है। वह दयालु है। इस मां के आगे अश्व, मध्य में रथ और पीछे हाथी है। श्रीदेवी के आगे अश्व, मध्य में एक रथ और पीछे चिंघाडऩे वाले गज, मात्र इतना अर्थ नहीं है। पराया दर्द जो अपनाए उसे इन्सान कहते हैं। पथिक जो बांट कर खाए उसे इन्सान कहते हैं।

यह वैदिक भाषा है, इसमें वेद का तत्व है जो कठिन और गूढ़ होता है। लक्ष्मी मैया के आगे अश्व का अर्थ चंचलता है। लक्ष्मी एक स्थान पर स्थिर नहीं होती है। नदी, साधु और पैसा यदि स्थान पर रुक गए तो बदबू आएगी। इनका चलते रहना ही कल्याणकारी है। बीच में 4 पहिए वाला रथ, चारों पुरुषार्थ का द्योतक हैं, अंत में हाथी। हाथी आगे चलता है, पीछे नहीं मुड़ता। इसकी छोटी-छोटी आंखें सूक्ष्मदर्शी होती हैं। हाथी भविष्यज्ञाता भी होता है।

हाथी के पीछे होने का अर्थ उस पर सूक्ष्म दृष्टि रखना दुरुपयोग हो तो हाथी की चिंघाड़ प्रबोध बने। लक्ष्मी अनपगामिनी है- वह धान्य लक्ष्मी है, कभी नष्ट न होने वाली ऐश्वर्य लक्ष्मी है। नीति कहती है कि धन का उपयोग 3 तरह से करो

-बालक की तरह उसे भोगो

-युवक की तरह दान दो

- वृद्ध की तरह उसे संभाल कर रखो।

मुझे ऐसी लक्ष्मी चाहिए जिसमें मुझे स्वर्ण, गाय, अश्व और पुरुष प्राप्त हों। हम मानते हैं इसलिए कहते हैं कि शरीर का मूल स्वरूप आरोग्य है। 

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