गणेश जी के शुभ प्रतीक चिन्हों का महत्व

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Monday, September 09, 2013-9:35 AM

द्वादश नाम : गणपति के द्वादश नामों का जो व्यक्ति प्रात:काल स्मरण करता है, उसे विघ्न बाधाओं का सामना नहीं करना पड़ता। ये नाम हैं- गणपति, विघ्नराज, लम्बतुंड, गजानन, द्वैमातुर, हैरंब, एकदंत, गणाधिप, विनायक, चारूकर्ण, पशुपाल और भवात्मज।
 
मूर्ति : गृहस्थों को घर में दो शिवलिंग, तीन गणेशजी की मूर्ति, दो शंख, दो सूर्य प्रतिमा, दो शालिग्राम, तीन दुर्गा की मूर्ति का पूजन नहीं करना चाहिए। घर में गणेशजी की मूर्ति एक से अधिक हो तो कोई फर्क नहीं पड़ता, पर पूजा एक ही गणेशजी की होनी चाहिए।

गणेशजी को चढ़ाने वाले पुष्प : गणेशजी को हरी दूर्वा सर्वाधिक प्रिय है। इन पर सभी पुष्प चढ़ाए जा सकते हैं। लाल पुष्प चढ़ाने से ये अति प्रसन्न होते हैं।

निषिद्ध फूल : गणेशजी को तुलसी नहीं चढ़ाई जाती, जो पुष्प अन्य देवी-देवताओं के लिए निषिद्ध हैं, वे गणेशजी को चढ़ाए जा सकते हैं।

दिशा : गणेशजी की मूर्ति मुख्य द्वार पर सिंदूर लगाकर स्थापित करने से अशुभ ऊर्जा का घर में प्रवेश नहीं होगा।

गणपति जी के आठ अवतार : गणेश भगवान के असंख्य अवतार हैं। परंतु उनमें से आठ प्रमुख हैं। वक्रतुंड, एकदंत, महोदर, गजानन, लम्बोदर, विकट, निराज तथा धूम्रवर्ण ।

श्वेतार्क और गणेश : श्वेतार्क को मदार या आक भी कहते हैं। ये दो प्रकार के होते हैं। शिव जी को अति प्रिय हैं। इसमें गणेशजी का वास कहा जाता है। तांत्रिक क्षेत्र में विशेष माना है। इसकी जड़ शुभ मुहूर्त में विधिपूर्वक पूजा करके घर में रखा जाए तो विशेष हितकारी होता है।

बुधवार : यह गणेशजी का मिश्र संज्ञक, शुभवार है। इस दिन किसी को कर्जा न दे परंतु कर्ज ले सकते हैं। इस दिन दिया गया धन वापस प्राप्त करने में काफी कठिनाई आती है। बैंक में फिक्स डिपॉजिट या वित्तीय भुगतान करना हो तो इस दिन करें।


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