देवी सरस्वती की 16 फुट ऊंची प्रतिमा वाशिंगटन में पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बन गई है

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Tuesday, September 10, 2013-1:22 AM

हिंदुस्तान में हमारी ही संस्कृति को बेशक नकारा जाता हो पर बाहर ऐसा नहीं है। मुस्लिम बहुल इंडोनेशिया ने अमेरिका को सरस्वती की प्रतिमा भेंट की दुनिया में मुस्लिमों की सबसे बड़ी आबादी वाले देश इंडोनेशिया ने अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन डीसी को शिक्षा और ज्ञान की हिन्दू देवी सरस्वती की 16 फुट ऊंची प्रतिमा भेंट की है।

कमल के एक फूल के ऊपर खड़ी देवी सरस्वती की यह प्रतिमा वाशिंगटन में स्थित भारतीय दूतावास से कुछ ही दूरी पर लगाई गई है। इस प्रतिमा के पास ही महात्मा गांधी की एक मूर्ति लगी है जो यहां कई साल पहले स्थापित की गई थी। इंडोनेशिया की कुल आबादी में हिन्दुओं की संख्या केवल तीन प्रतिशत है। व्हाइट हाउस से लगभग एक मील की दूरी पर लगाई गयी इस मूर्ति का आधिकारिक रूप से लोकार्पण किया जाना बाकी है लेकिन यह पहले ही शहर के लोगों और यहां आने वाले पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बन गई है।

इंडोनेशियाई दूतावास के एक प्रवक्ता ने कहा, "सरस्वती हिन्दुओं की देवी हैं। इंडोनेशिया के बाली में मुख्य रूप से इसी धर्म के लोग रहते हैं और इंडोनेशिया दुनिया का सबसे बड़ा मुस्लिम आबादी वाला देश है। सरस्वती की मूर्ति का चयन किसी धार्मिक आधार पर नहीं किया गया बल्कि इसका चयन प्रतीकात्मक मूल्यों पर किया गया जो व्यापक सहयोग के तहत इंडोनेशिया-अमेरिका के संबंध, विशेषकर शिक्षा और लोगों के बीच संपर्क, के समानांतर हैं।" वाशिंगटन डीसी को दिए गए इस सांस्कृतिक उपहार के निर्माण का काम इस साल मध्य अप्रैल में शुरू किया गया था और केवल पांच हफ्तों में इसे पूरा कर लिया गया। 4.9 मीटर ऊंची इस मूर्ति का निर्माण बाली के पांच मूर्तिकारों ने किया जिनका नेतृत्व आई न्योमन सुदर्व नाम के मूर्तिकार ने किया।

प्रवक्ता ने कहा, "यह मूर्ति बाली की कला को दर्शाती है। मूर्ति में देवी सरस्वती के चार हाथ दर्शाए गए हैं जो अलग-अलग संदेश देते हैं। इनमें से एक हाथ में एक अक्षमाला है जो ज्ञान की अनवरत प्रक्रिया को दर्शाता है, दो हाथ में वीणा बजा रहे है जो कला एवं संस्कृति का प्रतीक है और तीसरे में एक पांडुलिपि है तो ज्ञान के स्त्रोत को दिखाता है।

साथ ही सरस्वती जिस कमल पर खड़ी हैं वह ज्ञान की पवित्रता को दर्शाता है और हंस ज्ञान से मिलने वाले विवेक का प्रतीक है। प्रवक्ता ने कहा, "यह मूर्ति सांस्कृतिक प्रतीकों का रूप है। हम उम्मीद करते हैं कि इसकी स्थापना से हमें अपने विविधतापूर्ण समाज में आपसी समझ के महत्व को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।"

- भागवत आचार्य श्री रवि नंदन शास्त्री जी  महाराज जी
 


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