'रामसेतु पर भगवान राम के कदम पड़े थे'

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Wednesday, September 25, 2013-12:15 PM

देश के सॉलिसिटर जनरल मोहन परासरन ने राम सेतु मामले के संदर्भ में सरकार से अलग अपने विचार देकर स्वंय को मामले से विमुख कर लिया है। इंडिया टुडे ग्रुप से हुई खास भेंट में उन्होंने कहा कि,  'वह मानते हैं कि रामसेतु पर भगवान राम के कदम पड़े थे। मोहन विवादास्पद सेतुसमुद्रम प्रोजेक्ट मामले पर सुप्रीम कोर्ट में केंद्र की याचिका की पैरवी नहीं करेंगे।'


 इंडिया टुडे से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा, 'मैं उसी इलाके से आता हूं और नहीं चाहता कि लोग इसका मेरे खिलाफ इस्तेमाल करें। मैं अपने विश्वास पर कायम हूं। संविधान मुझे अलग राय रखने की इजाजत देता है, इसलिए मुझे लगा कि जितना जल्दी हो सके मुझे सरकार को अपना रुख साफ कर देना चाहिए।'

उन्होंने यह भी कहा कि उनके पिता भी सेतुसमुद्रम प्रोजेक्ट के याचिकाकर्ताओं के खिलाफ केस लड़ रहे थे इसलिए वह हितों के टकराव की स्थिति से बचना चाहते हैं।मोहन परासरन ने कहा कि नियमगिरि के मामले में भी कोर्ट ने बॉक्साइट संपन्न इलाके के लोगों की इच्छा का सम्मान किया। अयोध्या की तरह इसमें राय बनाने के लिए स्थानीय लोगों को शामिल किया जाना चाहिए।'

सरकार को संदेश देना चाहते हैं परासरन
नियमगिरि मामले में कोर्ट ने आम जनता को यह निर्णय लेने की मंजूरी दी थी कि पहाड़ में कहां से खनन किया जाए और कहां से नहीं। इस संदर्भ में स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं को समर्थन देने के लिए स्वंय कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी भी वहां पहुंचे थे।

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार परासरन अपने इस बयानके द्वारा सरकार को यह संदेश भी देना चाहते हैं कि रामसेतु के मुद्दे पर उनके कदम जोखिम भरे है। परासरन ने यह भी कहा कि सेतु के अस्तित्व को नासा भी मान्यता दे चुका है। उन्होंने कहा, 'कुछ पर्यावरण से जुड़े मुद्दे भी हैं, मुझे उम्मीद है कि सरकार उनका भी ध्यान रखेगी।'


सरकार का दावा, प्रोजेक्ट से होगा आर्थिक विकास
संसदीय मामलों की कैबिनेट समिति ने सेतुसमुद्रम प्रोजेक्ट को पुनर्जीवित करने का फैसला किया है परंतु यह मामला अभी अदालत के अधीन है। यूपीए ने पर्यावरण संबंधी रिपोर्टों को खारिज करते हुए प्रोजेक्ट के लिए प्रतिबद्धता जताई है। सरकार का कहना है कि, प्रोजेक्ट से आर्थिक गतिविधियों में तेजी आएगी।

डीएमके इस प्रोजेक्ट का कट्टरता से समर्थन कर रही है और केंद्र सरकार से अकसर इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में ले जाने की अपील करती रहती है।वही दूसरी ओर बीजेपी इस प्रोजेक्ट का विरोध कर रही है।

हालांकि परासरन ने कहा है कि, यह उनकी व्यक्तिगत राय है लेकिन केस से खुद को अलग करके उन्होंने सरकार को चौंका दिया है। जाहिर सी बात है, भारत में कोई भी मुख्यधारा की पार्टी नास्तिक नहीं दिखना चाहेगी।



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