गुरु चाण्डाल योग की अशुभता को शुभता में कैसे बदलें

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Thursday, September 26, 2013-7:34 AM

जन्म पत्रिका के एक ही भाव में जब गुरु और राहु एक साथ स्थित हो तो चाण्डाल योग बनता है।किसी भी जातक की जन्मपत्रिका में निर्मित होने वाला गुरु चाण्डाल योग उसके लिए सर्वाधिक प्रभावी उस समय होता है जब गुरु या राहु की महादशा, अंतरदशा या प्रत्यंतरदशा चल रही होती है। जब गोचर में गुरु राहु से युक्त होकर जातक के जन्मकालीन चंद्रमा से अशुभ भाव में गोचर कर रहा हो तो उस समय गुरु चाण्डाल योग का अत्यंत प्रतिकूल फल प्राप्त होता है।

ये गुरु शिक्षा व व्यवसाय को भी नष्ट कर देता है। राहु के बलवान होने पर जातक अपने गुरु को नीचा दिखाने वाला होता है। जिस जातक की कुंडली में यह योग हो वो स्वभाव से हठी, बड़ों का अपमान करने वाला,उनकी बातों को टालने वाला, वाचाल प्रवृती का होता है। गुरु चांडाल योग की अशुभता पर नियंत्रण रखने के लिए जातक के जीवन पर जो भी दुष्प्रभाव पड़ रहा हो उसे इस तरह दूर करें

—-भगवान शिव की आराधना करें।

—-गुरु व राहु का जाप से संबंधित वस्तुओं का दान करना चाहिए।

—- का जाप व दान करें।

—- गाय को भोजन दें व उसकी सेवा करें ।

—-नियमित हनुमान चालीसा का पाठ करें।

—- रोजाना हल्दी और केसर को मिला कर अथवा चन्दन का टीका लगाएं।

—- निर्धन विद्यार्थियों को शिक्षा का ज्ञान दें।

—— गणेश जी और माता सरस्वती की पूजा और मंत्र जाप करें।

—- बरगद के वृक्ष की जड़ में कच्चा दूध अर्पित करें।

—- केले का पूजन करें।

 


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