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जहां पृथ्वी और स्वर्ग एकाकार होते हैं

  • जहां पृथ्वी और स्वर्ग एकाकार होते हैं
You Are HereDharmik Sthal
Saturday, September 28, 2013-7:29 AM
सनातन धर्म में चार धाम की यात्रा का बहुत महत्व है। इन स्थानों के संबंध में कहा जाता है कि यह वही स्थल है जहां पृथ्वी और स्वर्ग एकाकार होते हैं। चारधाम में भारत की चारों दिशाओं के महत्‍वपूर्ण मंदिर आते हैं। ये मंदिर हैं- जगन्नाथपुरी, रामेश्वरम, द्वारका और बद्रीनाथ। भारतीय धर्मग्रंथों के अनुसार यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ हिंदुओं के सबसे पवित्र स्‍थान हैं। इनको चार धाम के नाम से भी जाना जाता हैं।

इन मंदिरों की स्थापना 8वीं सदी में आदिशंकराचार्य जी ने की थी। इन चारों मंदिरों की अपनी अपनी विशिष्टता व महत्ता है लेकिन इन सब में बद्रीनाथ सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण और अधिक तीर्थयात्रियों द्वारा दर्शन करने वाला मंदिर है।इसके महत्व की चर्चा वेदों व पुराणों तक में मिलती है।

यहां भगवान विष्णु स्वंय निवास करते है। यह स्थान भारत के उत्तरांचल राज्य में अलकनंदा नदी के बाएं तट पर नर और नारायण नामक दो पर्वत श्रेणियों के बीच में स्थित है। गंगा नदी की मुख्य धारा के किनारे बसा यह तीर्थस्थल हिमालय में समुद्र तल से 3,050 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यहां प्रचुर मात्रा में पाई जाने वाली जंगली बेरी बद्री के कार इस धाम का नाम बद्री पड़ा।

यहां भगवान विष्णु का विशाल मंदिर है और बदरीनाथ जी का स्वरूप शालग्रामशिला से र्निमित चतुर्भुज ध्यानमुद्रा में है। यहां नर-नारायण विग्रह की पूजा होती है और अखण्ड दीप जलता है, जो कि अचल ज्ञानज्योति का प्रतीक है। मंदिर में बदरीनाथ जी की दाहिनी तरफ धन के स्वामी कुबेर जी का स्वरूप और उनके समक्ष उद्धवजी हैं तथा उत्सवमूर्ति है। उत्सवमूर्ति शीतकाल में बरफ जमने पर जोशीमठ में ले जाई जाती है। उद्धवजी के पास ही चरणपादुका है। बायीं ओर नर-नारायण की मूर्ति है। इनके समीप ही श्रीदेवी और भूदेवी है।

भगवान विष्णु के स्वरूप का वर्तमान मंदिर 3,133 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और माना जाता है कि आदि शंकराचार्य, आठवीं शताब्दी के दार्शनिक संत ने इसका निर्माण कराया था। इसके पश्चिम में 27 किमी की दूरी पर स्थित बद्रीनाथ शिखर कि ऊंचाई 7,138 मीटर है। बद्रीनाथ में एक मंदिर है, जिसमें बद्रीनाथ या विष्णु की वेदी है। यह 2,000 वर्ष से भी अधिक समय से एक प्रसिद्ध तीर्थ स्थान रहा है।

बद्रीनाथ के अन्य धार्मिक स्थल-

1.अलकनंदा के तट पर स्थित अद्भुत गर्म झरना जिसे 'तप्त कुंड' कहा जाता है।

2.एक समतल चबूतरा जिसे 'ब्रह्म कपाल' कहा जाता है।

3.पौराणिक कथाओं में उल्लेखित एक 'सांप' शिल्ला है।

4.शेषनाग की कथित छाप वाला एक शिलाखंड 'शेषनेत्र' है।

5. भगवान विष्णु के पैरों के निशान हैं- 'चरणपादुका'

6.बद्रीनाथ से नजर आने वाला बर्फ़ से ढंका ऊंचा शिखर नीलकंठ, जो 'गढ़वाल क्वीन' के नाम से जाना जाता है।

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