हज़ारों अश्वमेध यज्ञों तथा सैकड़ों राजसूय यज्ञों से वो फल नहीं मिलता जो...

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Thursday, October 03, 2013-7:18 AM

मानसी गंगा के सभी घाटों का निर्माण जयपुर नरेश मान सिंह के पिता राजा भगवान दास ने कराया था। मानसी गंगा का बहुत महत्व है। मानसी गंगा गोवर्धन शहर के मध्य में बसा है। मानसी शब्द का मतलब है मन। मानसी गंगा की परिक्रमा किसी भी स्थान से किसी भी समय उठा सकते है मगर जहां से परिक्रमा आरम्भ करें वही पर आकर परिक्रमा को विराम देना चाहिए।

मुखारविन्द से परिक्रमा प्रारम्भ करते हैं। इस मानसी गंगा का प्रसिद्ध गंगा नदी से सर्वाधिक माहात्म्य है। वह श्री भगवान के चरणों से उत्पन्न हुई है और इसकी उत्पत्ति श्री भगवान के मन से है। मानसी गंगा के पूर्व तट पर मुखारविन्द मन्दिर के निकट श्री लक्ष्मीनारायण मन्दिर है। यहां से गोवर्धन परिक्रमा मार्ग में चलते हुए श्री हरिदेव जी का मन्दिर है।

फिर यहां से आगे परिक्रमा मार्ग में चलते हुए दानघाटी पर श्री दानबिहारी जी के मन्दिर के दर्शन होते हैं। चलते-चलते श्री लक्ष्मीनारायण मन्दिर, श्री राधा मदनमोहन मन्दिर, श्री बिहारी जी मन्दिर, श्री विश्वकर्मा मन्दिर, श्री वेंकटेश्वर मन्दिर, श्री राधावल्लभ मन्दिर, यहां से श्री श्यामसुन्दर मन्दिर, श्री चकलेश्वर महादेव मन्दिर इत्यादि होते हुए श्री मुखारविन्द मन्दिर में आते हुए परिक्रमा को विराम देते है।

मान्यता है कि पवित्र मानसी गंगा में डुबकी लगाने से आध्यात्मिक योग्यता श्री कृष्ण के प्यार के रूप में प्राप्त होती है। गोवर्धन की परिक्रमा की शुरुआत मानसी गंगा में डुबकी लगाकर शुरू होती है और खत्म भी। मानसी गंगा में एक बार स्नान करने से जो फल प्राप्त होता है वह हज़ारों अश्वमेध यज्ञों तथा सैकड़ों राजसूय यज्ञों के करने से प्राप्त नहीं होता हैं।


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