दुर्गा पूजा का आरंभ कब और कैसे हुआ ?

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Tuesday, October 08, 2013-7:48 AM

नवरात्र पर्व को आसुरी शक्तियों पर देवी शक्ति का विजय प्रतीक माना जाता है। मां दुर्गा के नौ रूपों शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता,कात्यायिनी,कालरात्रि, महागौरी एवं सिधिदात्री की पूजा आराधना प्रतिप्रदा से नवमी तक की जाती है। नौ शक्ति रूपों के पूजन के कारण ही इन दिनों को नवरात्र काल कहा गया है। गृ्हस्थ व्यक्ति नवरात्र में माता की पूजा आराधना कर अपनी आन्तरिक शक्तियों को जाग्रत करते है। इन दिनों में साधकों के साधन का फल व्यर्थ नहीं जाता। मां अपने भक्तों को उनकी साधना के अनुसार फल देती है। इन दिनों में दान पुण्य का भी बहुत महत्व होता है।

- पहली बार विष्णु अवतार श्री रामचन्द्र जी ने समुद्र तट पर नवरात्रे का पूजन पूरी श्रद्धा भाव से नौ दिनों तक किया था तथा मां भगवती का आशीर्वाद प्राप्त कर लंका विजय के लिए प्रस्थान किया था।

- धर्मशास्त्रों के अनुसार नौ दिनों तक आराधना से व्यक्ति को धन, सम्पदा, पूर्णता एवं श्रेष्ठता पूर्ण रूप से प्राप्त होती है।

- शास्त्रों के अनुसार मां भगवती के सिद्धिदात्री स्वरूप से भगवान शिव ने सिद्धियां प्राप्त की थीं। सिद्धिदात्री देवी की कृपा से भगवान शंकर का आधा शरीर देवी का था इसीलिए भगवान शिव को अर्धनारीश्वर के नाम से जाना जाता है।


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