कंजक पूजन करते समय कुछ बातों का अवश्य ध्यान रखें

  • कंजक पूजन करते समय कुछ बातों का अवश्य ध्यान रखें
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Friday, October 11, 2013-7:42 AM
कहते हैं कि इन नौ दिनों तक दैवीय शक्ति मनुष्य लोक में भ्रमण के लिए आती है। इन दिनों की गई उपासना-आराधना से देवी भक्तों पर प्रसन्न होती है, लेकिन पुराणों में वर्णित है कि मात्र श्लोक-मंत्र-उपवास और हवन से देवी को प्रसन्न नहीं किया जा सकता। नौ दिनों तक इन नन्ही कन्याओं को सुंदर उपहार देकर उनका दिल जीता जा सकता है। इनके माध्यम से नव दुर्गा को भी प्रसन्न किया जा सकता है। पुराणों की दृष्टि से नौ दिनों तक कन्याओं को एक विशेष प्रकार की भेंट देना शुभ होता है। कंजक पूजन करते समय कुछ बातों का अवश्य ध्यान रखें-

1 शास्त्रों में वर्णित है कंजक पूजन के दिन नौ कन्याओं को भोजन कराने का विधान है। अगर नौ से अधिक कन्याएं आपके घर में अपने चरण डालें तो इसे अपना सौभाग्य समझें। जो व्यक्ति नौ कन्याओं को भोजन करवाने में असमर्थ हो वो कम से कम दो कन्याओं को अवश्य भोजन करवाएं।

2 कंजक पूजन करते समय जात-पात का भाव मन में न लाएं। कंजक को साक्षात मां का रूप समझ कर ही पूजें।

3 कंजक पूजन के उपरांत पूरे घर में खेत्री के पास रखे कुंभ का जल सारे घर में छिड़के फिर स्वयं प्रसाद ग्रहण करें।

4 एक कन्या का पूजन करने से ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है, दो कन्याओं का पूजन करने से भोग और मोक्ष की प्राप्ति होती है,तीन कन्याओं की पूजा करने से धर्म, अर्थ व काम, चार कन्याओं की पूजा से राज्यपद, पांच कन्याओं की पूजा करने से विद्या, छ: कन्याओं की पूजा से छ: प्रकार की सिद्धियां प्राप्त होती हैं, सात बालिकाओं की पूजा द्वारा राज्य की, आठ कन्याओं की पूजा करने से धन-संपदा तथा नौ कन्याओं की पूजा से पृथ्वी प्रभुत्व की प्राप्ति होती है। कुमारीका पूजन में दस वर्ष तक की कन्याओं को मां का स्वरूप माना जाता है।

5 आठवां दिन नवरात्रि का सबसे पवित्र दिन माना जाता है। इस दिन अगर कन्या का अपने हाथों से शृंगार किया जाए तो देवी विशेष आशीर्वाद देती है। इस दिन कन्या के पैर दूध से पूजने चाहिएं। पैरों पर अक्षत, फूल और कुमकुम लगाना चाहिए। इस दिन कन्या को भोजन कराना चाहिए और यथा सामर्थय कोई भी भेंट देनी चाहिए। कन्या-पूजन में दक्षिणा अवश्य दें।

6 नौवें दिन खीर, ग्वारफली और दूध में गूंथी पूरियां कन्या को खिलानी चाहिएं। उसके पैरों में महावर और हाथों में मेहंदी लगाने से देवी पूजा संपूर्ण होती है। अगर आपने घर पर हवन का अयोजन किया है तो उसके नन्हे हाथों से उसमें समिधा अवश्य डलवाएं। उसे इलायची और पान का सेवन कराएं। इस परंपरा के पीछे मान्यता है कि देवी जब अपने लोक जाती है तो उसे घर की कन्या की तरह ही विदा किया जाना चाहिए। अगर सामर्थय हो तो नौवें दिन लाल चुनर कन्याओं को भेंट में दें। उन्हें दुर्गा चालीसा की छोटी पुस्तकें भेंट करें। गरबा के डांडिया और चणिया-चोली भी दिए जा सकते हैं।

इन सारी रीतियों के अनुसार पूजन करने से देवी प्रसन्न होकर वर्ष भर के लिए सुख, समृद्धि, यश, वैभव, कीर्ति और सौभाग्य का वरदान देती है।


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