सनातन धर्म की गौरवशाली परंपराएं

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Tuesday, October 15, 2013-7:37 AM

सनातन केवल धर्म नहीं अपितु ये सफल जीवन जीने का तरीका है। हिंदू धर्म में कई विशेषताएं है। इसको सनातन धर्म भी कहां गया है। भागवद गीता के अनुसार,"सनातन का अर्थ होता है वो जो अग्नि से, पानी से, हवा से,अस्त्र से नष्ट न किया जा सके और वो जो हर जीव व निर्जीव में विद्यमान है।"

 धर्म का अर्थ होता है," जीवन जीने की कला।"

सनातन धर्म की जड़े आद्यात्मिक विज्ञान में है। सम्पूर्ण हिंदू शास्त्रों में विज्ञान और आध्यात्म जुड़े हुए है। यजुर्वेद के चालीसवें अध्याय के उपनिषद में ऐसा वर्णन आता है कि जीवन की समस्याओं का समाधान विज्ञान से और आद्यात्मिक समस्याओं के लिए अविनाशी दर्शनशास्त्र का उपयोग करना चाहिए।

स्मृति हमें बताती है की व्यक्ति को एक चौथाई ज्ञान आचार्य या गुरु से मिल सकता है, एक चौथाई स्वयं के आत्मावलोकन से, अगला एक चौथाई अपने संग या संगती में विचार विमर्श करने से और आखिरी एक चौथाई अपने जीवन शैली से जिसमें सद्विचार और सदव्यवहार को जोड़ना, कमजोरीयों को हटाना, अपना सुधार करते रहना और समय के अनुकूल परिवर्तन करना शामिल है।

कभी किसी ने इसका विश्लेषण नहीं किया। कहते हैं कि हमारे यहां आपसी संबंधों का बड़ा महत्व है, पर यह इसको तो विदेशी संस्कृतियों में भी पूरा स्थान प्राप्त है।

                                                                        - भागवत आचार्य श्री रवि नंदन शास्त्री जी महाराज जी
 


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