मासिक धर्म से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं

  • मासिक धर्म से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं
You Are HereDharm
Wednesday, October 16, 2013-7:50 AM

 ज्योतिषीय आधार पर उस मासिक धर्म को शुद्ध माना जाता है जो 28 वें दिन आए क्योंकि नक्षत्र 27 हैं अर्थात जिस नक्षत्र में आज मासिक आया है। उसी नक्षत्र में अगले माह आएगा। मासिक धर्म में जो अनियमितता होती है उसका कारण भी ये नक्षत्र ही होते हैं। अगर किसी महिला पर ऊपरी बाधा,परेशानी व नजर का प्रभाव हो तो उसमें निम्न विकार उत्पन्न हो जाते हैं जैसे

1 माहवारी में आने वाला खून कुछ काला पन लिए होता है।

2 महावरी के समय जांघों पर अजीब तरह के निशान हो जाना और माहवारी समाप्त होते ही उन निशानों का गायब हो जाना।

3 उन्हें सोते समय आभास होता है की कोई पुरुष उनके साथ संभोग कर रहा है।

4 देखने में वह मोटी,थुलथुले शरीर वाली हो जाती हैं मगर अंदरूनी तौर पर वह बहुत कमजोर होती हैं।

कुछ बातों का अवश्य ध्यान रखें

1 मासिक धर्म के दौरान महिलाएं जो भी कपड़ा या सेनेटरी नेपकिन प्रयोग करती हैं। उन्हें कहीं पर भी मत फैंके। उसे किसी कागज में अच्छी तरह लपेटकर कूड़ेदान में ही डालें।

2 विशेष पर्व और त्यौहार के दिन पति-पत्नी को गृहस्थ कर्म नहीं करने चाहिए।

3 अपने बालों में कंघी करके बाल इधर उधर मत फैंके उन्हें इकट्ठा करके थूक कर कूड़ेदान में डालें।

4 नाख़ून काटने के बाद कहीं पर भी नहीं फैंके। उन्हें इकट्ठा करके कूड़ेदान में डालें।

5 चौराहा पार करते समय हमेशा अपनी दाहिनी दिशा से पार करें क्योंकि ऊपरी हवाएं हमेशा विपरीत कार्य करने पर ही परेशान करती हैं। इन हवाओं का प्रभाव रजस्वला स्त्रियों पर जल्दी पड़ता है क्योंकि ऐसे समय में चंद्र व मंगल दोनों दुर्बल हो जाते हैं। ये दोनों राहु व शनि के शत्रु हैं। स्त्री अशुद्ध अवस्था में होती है और अशुद्धता राहु की द्योतक है। ऐसे में उस स्त्री पर ऊपरी हवाओं के प्रकोप की संभावना ज्यादा रहती है।

 


विवाह प्रस्ताव की तलाश कर रहे हैं ? भारत मैट्रीमोनी में  निःशुल्क  रजिस्टर  करें !

Recommended For You