शरद पूर्णिमा- काम के हनन से आत्मा और परमात्मा के मिलन की रात

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Friday, October 18, 2013-12:42 PM

आज शरद पूर्णिमा है। पूरे वर्ष में केवल शरद पूर्णिमा को, वृन्दावन के श्री बांके बिहारी मंदिर में प्रभु के हाथों में मुरली शोभायेमान होती है। शरद पूर्णिमा की रात्रि में दर्शनों का विशेष महत्व है। इस दिन चन्द्रमा की किरणों से अमृत-तत्त्व बरसता है। चन्द्रमा अपनी पूर्ण कलाओं के साथ पृथ्वी पर शीतलता, पोषकशक्ति एवं शांतिरूपी अमृतवर्षा करता है।

आध्यात्मिक दृष्टि से देखा जाए तो चन्द्र का मतलब होता है शीतलता। बाहर कितने भी परेशान करने वाले प्रसंग आएं लेकिन आपके दिल में कोई फरियाद न उठे। आप भीतर से ऐसे पुष्ट हों कि बाहर की छोटी-मोटी मुसीबतें आपको परेशान न कर सकें। इस दिन व रात में खूब मन्त्र जाप करें। रात्रि को चंद्रमा के नीचे खुली आंखों से चंद्रमा को निहारते हुए गोपी गीत का पाठ करना चाहिए ।

इस रात को जो रस बरसता है वो दुर्लभ होता है। कोई और विचार मन में न आएं अपना मन्त्र अन्दर चलता रहे आज के दिन व रात जो प्रणय गीत ,वेणु गीत ,गोपी गीत, भ्रमर गीत ,युगल गीत,का पाठ करता है व रास की दिव्य चर्चा का अध्यात्मिक अर्थ समझ कर ह्रदय में महारास का ध्यान करता है निश्चित ही उसको दिव्य अनुभूतियां होती हैं।

भगवत के रास पंचाध्यायी के 5 अध्याय भगवान के पांच प्राण है। गोपी गीत भगवान का ह्रदय हैं इसलिए जितना हो सके गोपी गीत का पाठ करो चंद्रमा की अमृतरूपी किरणों के नीचे बैठ कर या लेट कर। इन पांच गीतों के पाठ से ह्रदय के रोग दूर होते हैं। कामवासना का बीज भून देता है गोपी गीत का पाठ। घर की छत पर परिवार सहित बैठो व जप करो हो सके तो रात भर वहीं लेट जाओ । नाभि पर चंद्रमा की किरने पड़ने दो।

जितना हो सके जप करें 9 बजे से 12 बजे रात तक शुभ मूर्हत है। कामदेव ने भगवान श्रीकृष्ण से कहा कि, "हे वासुदेव ! मैं बड़े-बड़े ऋषियों, मुनियों तपस्वियों और ब्रह्मचारियों को हरा चुका हूं। मैंने ब्रह्माजी को भी आकर्षित कर दिया। शिवजी की भी समाधि विक्षिप्त कर दी अब आपकी बारी है। "

भगवान श्रीकृष्ण ने कहा, "अच्छा! मुझ पर तू अपनी शक्ति का जोर देखना चाहता है।"

जब चन्द्रमा पूर्ण कलाओं से विकसित हो, शरद पूनम की रात हो, तब तुझे मौका मिलेगा। शरद पूनम की रात आयी और श्रीकृष्ण ने बजायी बंसी। बंसी में श्रीकृष्ण ने 'क्लीं' बीजमंत्र फूंका। क्लीं बीजमंत्र फूंकने की कला तो भगवान श्रीकृष्ण ही जानते हैं। यह बीजमंत्र बड़ा प्रभावशाली होता है। श्रीकृष्ण हैं तो सबके सार और अधिष्ठान लेकिन जब कुछ करना होता है न तो राधा जी का सहारा ढूंढते हैं।

राधा भगवान की आह्लादिनी शक्ति है।भगवान बोले, "राधे देवी ! तू आगे-आगे चल। कहीं तुझे ऐसा न लगे कि ये गोपिकाओं में उलझ गये, फंस गये है। तुम भी साथ में रहो। अब युद्ध करना है। काम बेटे को जरा अपनी विजय का अभिमान हो गया है। तो आज उसके साथ दो दो हाथ होने हैं।"

भगवान श्रीकृष्ण ने बंसी बजायी, क्लीं बीजमंत्र फूंका। 32 राग, 64 रागिनियां। शरद पूनम की रात, मंद-मंद पवन बह रही है। राधा रानी के साथ हजारों सुंदरियों के बीच भगवान बंसी बजा रहे हैं। कामदेव ने अपने सारे दांव आजमा लिए सब विफल हो गए।

भगवान श्रीकृष्ण ने कहा, "काम ! आखिर तो तू मेरा बेटा ही है !"

वही काम भगवान श्रीकृष्ण का बेटा प्रद्युम्न होकर आया। कालों के काल, अधिष्ठानों के अधिष्ठान तथा काम-क्रोध, लोभ मोह सबको सत्ता-स्फूर्ति दने वाले और सबसे न्यारे रहने वाले भगवान श्रीकृष्ण को जो अपनी जितनी विशाल समझ और विशाल दृष्टि से देखता है, उतनी ही उसके जीवन में रस पैदा होता है। मनुष्य को चाहिए कि वह अपने जीवन के विध्वंसकारी, विकारी हिस्से को शांति, सर्जन और सत्कर्म में बदल के, सत्यस्वरूप का ध्यान और ज्ञान पाकर परम पद पाने के रास्ते सजग होकर लग जाये तो उसके जीवन में भी भगवान श्रीकृष्ण की रासलीला होने लगेगी।

 नर्तक तो एक हो और नाचने वाली अनेक हों, उसे रासलीला कहते हैं। नर्तक एक परमात्मा है और नाचने वाली वृत्तियां बहुत हैं। और नाचने वाली नाचते-नाचते नर्तक में खो जायें और नर्तक को खोजने लग जायें और नर्तक उन्हीं के बीच में, उन्हीं के वेश में छुप जाय-यह बड़ा आध्यात्मिक रहस्य है।

 बासरी बजाय आज रंग सो मुरारी ।
श्रीवृंदावन बन्सी बजी तीन लोक प्यारी ।
ग्वाल बाल मगन भयी व्रजकी सब नारी ॥
शिव समाधि भूलि गये,मुनि मनकी तारी ...
मुरली गति बिपरीत कराई।
तिहुं भुवन भरि नाद समान्यौ राधारमन बजाई॥
बछरा थन नाहीं मुख परसत, चरत नहीं तृन धेनु।
जमुना उलटी धार चली बहि, पवन थकित सुनि बेनु॥
बिह्वल भये नाहिं सुधि काहू, सूर गंध्रब नर-नारि।
सूरदास, सब चकित जहां तहं ब्रजजुवतिन सुखकारि॥

                                                                                         

 


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