राजकीय सम्मान प्राप्त करना चाहते हैं तो....

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Saturday, October 19, 2013-9:36 AM

                                                                ॐ ह्रीं घृणिः सूर्य आदित्यः क्लीं ॐ

ग्रहों के राजा श्री सूर्य भगवान के दर्शन, पूजन, जाप, अभिषेक व दान द्वारा राजकीय सम्मान प्राप्त होता है व समस्त रोगों का निवारण होता है। सूर्य प्रत्यक्ष देवता है,सम्पूर्ण जगत के नेत्र हैं। इन्हीं के द्वारा दिन और रात का सृजन होता है। इनसे अधिक निरन्तर साथ रहने वाला और कोई देवता नहीं है। इन्हीं के उदय होने पर सम्पूर्ण जगत का उदय होता है और इन्हीं के अस्त होने पर समस्त जगत सो जाता है। सुख-सौभाग्य की वृद्धि के लिए, दुःख-दारिद्र्‌य को दूर करने के लिए, रोग व दोष के शमन के लिए इस प्रभावकारी मंत्र की साधना रविवार के दिन करनी चाहिए। इस दिन सूर्य देव को जल चढ़ाते हुए इस मंत्र का जाप करें-


आदि देव: नमस्तुभ्यम प्रसीद मम भास्कर ।
दिवाकर नमस्तुभ्यम प्रभाकर नमोअस्तु ते ॥
सप्त अश्व रथम आरूढम प्रचंडम कश्यप आत्मजम ।
श्वेतम पदमधरम देवम तम सूर्यम प्रणमामि अहम ॥
लोहितम रथम आरूढम सर्वलोकम पितामहम ।
महा पाप हरम देवम त्वम सूर्यम प्रणमामि अहम ॥
त्रैगुण्यम च महाशूरम ब्रह्मा विष्णु महेश्वरम ।
महा पाप हरम देवम त्वम सूर्यम प्रणमामि अहम ॥
बृंहितम तेज: पुंजम च वायुम आकाशम एव च ।
प्रभुम च सर्वलोकानाम तम सूर्यम प्रणमामि अहम ॥
बन्धूक पुष्प संकाशम हार कुण्डल भूषितम ।
एक-चक्र-धरम देवम तम सूर्यम प्रणमामि अहम ॥
तम सूर्यम जगत कर्तारम महा तेज: प्रदीपनम ।
महापाप हरम देवम तम सूर्यम प्रणमामि अहम ॥
सूर्य-अष्टकम पठेत नित्यम ग्रह-पीडा प्रणाशनम ।
अपुत्र: लभते पुत्रम दरिद्र: धनवान भवेत ॥
आमिषम मधुपानम च य: करोति रवे: दिने ।
सप्त जन्म भवेत रोगी प्रतिजन्म दरिद्रता ॥
स्त्री तैल मधु मांसानि य: त्यजेत तु रवेर दिने ।
न व्याधि: शोक दारिद्रयम सूर्यलोकम गच्छति ॥


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