अहोई अष्टमी के व्रत को लेकर कुछ मतांतर हैं कि क्या इसे शनिवार को रखा जाए या रविवार को ?

  • अहोई अष्टमी के व्रत को लेकर कुछ मतांतर हैं कि क्या इसे शनिवार को रखा जाए या रविवार को ?
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Friday, October 25, 2013-5:22 PM
अहोई अष्टमी 26 अक्तूबर को आरंभ 27 को समाप्त
दो दिन जम कर करें धनतेरस जैसी खरीदारी
 
व्रत कब रखें ?
पंचांगानुसार शनिवार की सायं सप्तमी 4 बजकर बजे समाप्त होगी और अष्टमी आरंभ होकर इतवार की सायं 6 बजकर 15 मिनट तक रहेगी। इस प्रकार अहोई का व्रत 27 अक्तूबर को अधिक सार्थक  होगा। शनिवार को  सिद्घि योग ,प्रात: 11.50 मिनट तक रहेगा और बाद में साध्य योग रविवार को दोपहर 12.36 तक रहेगा।  26 अक्तूबर  के दिन  रवि - पुष्य योग सायं 4.30 से आरंभ होकर रविवार सायं 7.15 तक रहेगा। 
 
पूजा का मुहूर्त- शनिवार 
सायं - 17.35 से 18.54 तक 
पुष्य नक्षत्र व सिद्घि योग हैं शुभ
 
इन  दोनों दिन धनतेरस जैसा शुभ योग 26 व 27 अक्तूबर को पड़ रहा है। इस दिन ब‘चों के लिए लैपटॉप, शिक्षा संबंधी वस्तुएं खरीदी जा सकती हैं क्योंकि यह योग शिक्षा से संबंधित भी  है। इस योग में सोने की खरीदारी, दीर्घकालीन निवेश, भूमि संबंधी डील , वाहन क्रय आदि विशेष शुभ रहेगा।
 

क्या है अहोई अष्टमी ?
करवा चौथ के चार दिन बाद और दीपावली से एक सप्ताह पूर्व पडऩे वाला यह व्रत, पुत्रवती महिलाएं ,पुत्रों के कल्याण,दीर्घायु, सुख समृद्घि के लिए निर्जल करती हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में सायंकाल घर की दीवार पर 8 कोनों वाली एक पुतली बनाई जाती है। इसके साथ ही स्याहू माता अर्थात सेई तथा उसके ब‘चों के भी चित्र बनाए जाते हैं। आप अहोई माता का कैलेंडर दीवार पर लगा सकते हैं। पूजा से पूर्व चांदी  का पैंडल  बनवा कर चित्र पर चढ़ाया जाता है और दीवाली के बाद  अहोई माता की आरती करके उतार लिया जाता है और अगले साल के लिए रख लिया जाता है। व्रत रखने वाली महिला की जितनी संतानें हों उतने मोती इसमें पिरो दिए जाते हैं। जिसके यहां नवजात शिशु हुआ हो या पुत्र का विवाह हुआ हो , उसे अहोई माता का उजमन अवश्य करना चाहिए।
 
 
विधि
एक थाली में सात जगह 4-4 पूरियां रखकर उस पर थेाड़ा थोड़ा हलवा रखें। चंद्र को अध्र्य दें । एक साड़ी ,एक ब्लाउज,व कुछ राशि इस थाली के चारों ओर घुमा के , सास या समकक्ष पद की किसी महिला को चरण छूकर उन्हें दे दें। वर्तमान युग में जब पुत्र तथा पुत्री  में कोई भेदभाव नहीं रखा जाता , यह व्रत सभी संतानों अर्थात पुत्रियों की दीर्घायु के लिए भी रखा जाता है। पंजाब ,हरियाणा व हिमाचल में इसे झकरियां भी कहा जाता है।

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