विधि के विधान को कैसे बदला जा सकता है ?

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Monday, October 28, 2013-2:34 PM

संत तुलसीदास जी कहीं जा रहे थे। इतने में एक स्त्री जोकि सती होने जा रही थी सामने से आ गई। हमारे शास्त्रों में लिखा है कि महात्माओं को दण्डवत प्रणाम करना चाहिए। संत जी को देखते ही उस स्त्री ने दण्डवत प्रणाम किया, तब तुलसीदास जी ने उसको आर्शीवाद दिया," सदा सुहागन रहो।"

तुलसीदास जी के मुख से ऐसे वचन सुन कर स्त्री फूट फूट कर रोने लगी और बोली, "बड़े आश्चर्य की बात है संसार पलट सकता है, प्रलय आ सकती है परंतु संत का वचन झूठा नहीं हो सकता।"

स्त्री के मुख से ऐसे वचन सुनकर तुलसीदास जी ने कहा, "अरथी नीचे रख दो और तुम सभी आंखे बंद करके राम नाम का जाप करो।"

इतना कहकर तुलसीदास जी भी राम नाम का जाप करने लगे। कुछ समय उपरांत कमण्डल से गंगा जल लेकर मृतक शरीर पर छिड़का और वह जीवित हो गया। आर्शीवाद और नाम के प्रभाव से प्रकृति बदल गई। शास्त्रों में लिखा है," संतों के आर्शीवाद और वाणी में इतनी शक्ति है कि विधि के विधान को बदल दें। जिसको संतों का आर्शीवाद मिलता है उसका जीवन हमेशा मंगलमयी रहता है। उसका कभी अमंगल नहीं होता। संतों का आर्शीवाद ही सबसे बड़ी पूंजी है।"

गीता में लिखा है कि," नाम के बिना जहां भी मन जाएगा आवागमन छूट नहीं सकता।"

यह पवित्र नाम सदैव आपको आशीर्वाद देता है । यदि आप निरंतर जाप करते रहेंगे तो आपको मानसिक शांति मिलेगी । इस पवित्र नाम की शक्ति और इसकी तरंगे सदैव आपके ऊपर विद्यमान रहेंगी। कुछ समय बाद आप ईश्वर के प्रति प्रेम एवं समर्पण की अनुभूति के साथ जाप करेंगे। यही राम नाम की शक्ति है ।

 


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