ततरस्तान के चर्च मंदिर तथा मस्जिदें

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Monday, October 28, 2013-2:40 PM

ततरस्तान की राजधानी कज़ान से 170 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है बुलगार। यह प्राचीन काल में वोल्गा बुलगार की राजधानी थी। 922 ईस्वी में यहां के बुलगार लोगों ने इस्लाम कबूल कर लिया। उनके भाग्य ने उनका इस्लामिक दुनिया में प्रवेश करवा दिया। यह वही स्थान है जहां इस्लाम ने रूस में अपना अस्तित्व स्थापित किया। ततरस्तान में अधिकतर जनसंख्या तातर मुसलमानों तथा रूसी इसाइयों की है। इसके अतिरिक्त कई अल्पसंख्यक समुदाय बुलगार, यहूदी तथा बौद्ध भी यहां के निवासी हैं।

यहां मुस्लिम धर्म की प्रमुखता के बावजूद दूसरे धर्मों के लोग भी किसी तरह की घुटन महसूस नहीं करते। यहां 1000 से अधिक धार्मिक स्थानों में शामिल मंदिर, मस्जिदें तथा चर्च जहां भवन निर्माण कला के लिए प्रशंसा योग्य हैं वहीं वर्तमान में लोगों की धार्मिक आजादी का प्रतीक भी हैं। ‘अमर ह्यूम चर्च ऑफ 1551’ का जिक्र यहां करना बहुत महत्वपूर्ण है जो पूर्ण रूप से लकड़ी का बना हुआ है तथा इसकी रचना के वक्त एक भी कील नहीं लगाई गई। यह आज पांच शताब्दियां बीतने के बावजूद पूरी तरह कायम है और पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है।  यह लकड़ी के मोटे लट्ठों का बना हुआ है।

जोड़ों की जगह इन लट्ठों को ही काट कर जोड़ जैसी जगह बनाई हुई है। इसकी दीवार पर चढऩे के लिए सीढ़ी भी लकड़ी में कटाई करके बनाई गई है जो इसके निर्माण के वक्त सामान आदि देने के लिए इस्तेमाल की गई। आज यह सीढ़ी इस्तेमाल में नहीं है सिर्फ प्राचीन कला के प्रतीक के तौर पर ही इसकी देखभाल हो रही है। इस चर्च में आज भी सैंकड़ों की संख्या में धार्मिक श्रद्धा तथा भवन निर्माण कला के कद्रदान इसके दर्शनों के लिए आते हैं। यहां पर ही एक आर्कचीनो सर्वधर्म मंदिर है जिसके बारे में पता चला है कि इसके निर्माता ने इसकी स्थापना के लिए बहुत संघर्ष किया था।

इस मंदिर को इसके निर्माता ने अपने घर में ही बनाया है इसलिए उसे सरकारी तथा कई तरह की कानूनी अड़चनों का सामना भी करना पड़ा तथा कई किस्म की परेशानियों का भी। इस मंदिर में महात्मा बुद्ध की प्रतिमा भी सामने से ही नजर आ जाती है। 1766 ईस्वी में महारानी कैथरीन द्वारा बनवाई गई मर्दज़ामी मस्जिद कज़ान में मौजूद है। यह एक ऐसी मस्जिद है जहां सोवियत शासन के समय भी धार्मिक कार्य निरंतर चलते रहे।  कज़ान में मौजूद क्रैमलिन विश्व प्रसिद्ध विरासत स्थल है जिसे 2009 में स्थापित किया गया। यह साफ-सफाई, खूबसूरती तथा भवन निर्माण कला का गढ़ माना जाता है जिसे यूनेस्को ने विश्व विरासत स्थल का दर्जा दिया है। इसमें सेंट पीटर्स चर्च, पॉल कैथेड्रल तथा कुल शरीफ मस्जिदें मौजूद हैं।

कज़ान क्रैमलिन के इतिहास पर दृष्टि डालने पर पता चलता है कि किसी वक्त ततरों के खान ने यहां अपना महल बनाया था जिसे ज़ार इवान ने ध्वस्त करके गिरजाघर की स्थापना की। यहां रूसी सम्राटों से संबंधित प्राचीन गिरजे भी मौजूद हैं। 2005 में ततरस्तान के 1000 वर्षीय जश्र मनाने के फैसले के दौरान क्रैमलिन में गिरजे का पुनर्निर्माण किया गया। कज़ान के अंतिम सैय्यद कुल शरीफ के पुराने घर के स्थान पर एक नई मस्जिद बनाई गई। यह गिरजा घर तथा मस्जिद एक अजूबे जैसे हैं।

यह जगह किसी समय फौजों के ठहरने के लिए भी इस्तेमाल की जाती थी। यह उस वक्त की सरकार का केंद्र भी रही आज यहां नवविवाहित जोड़े मिलते हैं जो अपने रिश्तेदारों तथा मित्रों समेत इन धार्मिक स्थानों पर प्रार्थना करने आते हैं। यहां की इमारतों की खूबसूरती, साफ-सफाई तथा सफेद परिधानों में सजे दूल्हे-दुल्हनें किसी परी लोक का भ्रम पैदा करते हैं। धार्मिक विभिन्नता यहां के खुशनुमा माहौल की गवाही देती है। यहां लोग विदेशी पर्यटकों में पगड़ीधारी सिखों को विशेष रुतबे से देखते हैं तथा उनके साथ फोटो खिंचवाने के पीछे दीवाने हो जाते हैं।


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