यंत्रों से करें अपने अनुकूल ग्रह

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Monday, October 28, 2013-2:40 PM

श्री यंत्र
आर्थिक उन्नति और भौतिक सुख-संपदा के लिए इससे बेहतर कोई यंत्र नहीं है। लक्ष्मी जी को प्रसन्न करने और व्यापार वृद्धि के लिए श्रीयंत्र सर्वश्रेष्ठ है। श्रीयंत्र आर्थिक ऋण से मुक्ति दिलाता है और साथ ही मनोकामनाएं भी पूरी करता है। इसे केसर मिले हुए दूध से नहलाकर पूजन स्थल, व्यावसायिक स्थल, कार्यालय, घर या किसी भी शुद्ध स्थान पर लाल रेशमी कपड़े पर स्थापित करना चाहिए।

धर्मशास्त्रों एवं तांत्रिक ग्रंथों में  इसे यंत्रराज की संज्ञा भी दी गई है। श्रीयंत्र साक्षात लक्ष्मी जी का प्रतीक एवं सर्वविद्या रक्षा का एक साधन है, जो यमराज की कुदृष्टि से भी रक्षा करता है, क्योंकि इसमें अनेक देवी-देवताओं का वास है। जिस घर में श्रीयंत्र स्थापित होता है, वह घर-परिवार सर्वत्र मंगलमय सुख एवं शांति अनुभव करता है। सोने में बना श्रीयंत्र आजीवन, चांदी से बना श्रीयंत्र 22 वर्ष, तांबे से बना श्रीयंत्र 12 वर्ष तथा भोजपत्र पर लिखित श्रीयंत्र 6 वर्ष तक शुभ फल देता है। सदाचारी, विद्वान, धर्मज्ञ, अपने माता-पिता की सेवा करने वाले, रोज पुण्य प्राप्त करने वाले, क्षमा करने वाले, बुद्धिमान, दयावान तथा गुरु की सेवा करने वाले व्यक्ति के घर श्रीयंत्र अधिक लाभ देता है।

कुबेर यंत्र

जिन लोगों पर निरंतर कर्जा बना रहता है, व्यापार में लगाया धन डूब जाता है, व्यापार नहीं चलता हो, घर में बरकत न होती हो, दरिद्रता कभी साथ नहीं छोड़ती हो, किए गए कर्म या मेहनत का पूर्ण फल न मिलता हो तो उनको श्री कुबेर की आराधना अवश्य करनी चाहिए। यदि अपने कत्र्तव्यों का निष्ठा से पालन करते हुए श्रीकुबेर की उपासना की जाए तथा पूजा घर में कुबेर यंत्र स्थापित किया जाए तो वे निश्चित प्रसन्न होकर व्यापार वृद्धि, धन वृद्धि, ऐश्वर्य, लक्ष्मी कृपा प्रदान कर घर में सुख-समृद्धि एवं सौभाग्य में वृद्धि करते हैं। कुबेर की उपासना वैसे तो कभी भी की जा सकती है, लेकिन होली, दीपावली या शुक्रवार को की जाए तो अतिशीघ्र उत्तम फल प्राप्त होते देखे गए हैं।

सरस्वती यंत्र
शिक्षा संबंधी सफलता के लिए सरस्वती यंत्र की पूजा किसी वरदान के सच होने जैसी है। यह यंत्र शिक्षा में आने वाली सभी बाधाएं दूर करता है। छह मुखी नेपाली रूद्राक्ष व शुद्ध पन्ना चांदी में जड़े हुए सरस्वती कवच को धारण करने से भी शिक्षा के क्षेत्र में आने वाली सभी बाधाएं समाप्त हो जाती हैं। बच्चों का मन पढ़ाई की ओर लगने लग जाता है। सरस्वती यंत्र स्थापित करने व रूद्राक्ष + रत्न कवच धारण करने से विद्यार्थियों को बहुत लाभ मिलता है।

महामृत्युंजय यंत्र
हमारे वेद शास्त्रों में सभी रोगों से मुक्ति के लिए महामृत्युंजय यंत्र और मंत्र की साधना का विशेष महत्व बताया गया है।  महामृत्युंजय यंत्र की स्थापना करके नित्य दर्शन-पूजन करके कोई भी व्यक्ति जीवन में आरोग्यता प्राप्त कर सकता है। इससे शारीरिक शक्ति प्रबल होती है, जिससे व्यक्ति के रोगी होने की संभावना नहीं रहती। महामृत्युंजय यंत्र केवल शारीरिक तथा मानसिक व्याधियों से ही नहीं, मृत्यु से भी रक्षा करता है।

संतान गोपाल यंत्र
नि:संतान होने का दुख वही समझ सकता है, जिसकी गोद अब तक सूनी हो। अपने वंश को आगे बढ़ाने के लिए संतान उत्पन्न करना ही पति-पत्नी का धर्म होता है, लेकिन दुर्भाग्यवश यदि उचित प्रयासों के पश्चात भी संतान न हो तो इसका दुख बहुत होता है। ऐसे में ‘संतान गोपाल यंत्र’ पूजाघर में स्थापित कर सकते हैं। ‘गर्भरक्षा’ के लिए ‘गर्भ रक्षा यंत्र’ सहायक हो सकता है।

मंगल यंत्र
ज्योतिष शास्त्र में मंगल को क्रूर व अशुभ ग्रह माना है।  शुभ होने पर यह बल, क्षमता तथा सम्पत्ति में वृद्धि करता है और जातक को जीवन के सभी क्षेत्रों में सफलता बड़ी आसानी से मिलती चली जाती है। विवाह में अनावश्यक देरी तथा दांपत्य जीव में तनाव व लड़ाई झगड़ा मांगलिक दोष के अनिष्ट परिणामों में सम्मिलित है।

मंगलग्रह से संबंधित दोष निवारण का एक उपाय ‘श्रीमंगल यंत्र’ भी है। ‘श्रीमंगल यंत्र’ न केवल विवाह बाधा, दाम्पत्य जीव में अनबन, रक्त विकार, कोर्ट कचहरी से जुड़े मामलों व दुर्घटनाओं के निवारण में ही लाभदायक हैं, बल्कि ब्लड प्रैशर को नियंत्रित करके मानसिक व शारीरिक रूप से स्वस्थ बनाकर बेहतर भविष्य दे सकता है।


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