रंगोली से करें खुशियों का स्वागत

  • रंगोली से करें खुशियों का स्वागत
Thursday, October 31, 2013-1:36 PM

भारतीय संस्कृति में शुभ कामों एवं रंगोली का अनन्य संबंध है। होली हो या दीवाली, रंगोली के बिना अधूरी ही मानी जाती हैं। रंगोली संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ है ’रंगों के द्वारा अभिव्यक्ति।’ रंगों से सजी रंगोली वास्तव में खुशियों की अभिव्यक्ति है...

रंगोली बनाना आज भले ही घर की सुन्दरता को बढ़ाने का एक जरिया हो, लेकिन गुजरे वक्त में खुशियों के स्वागत के लिए घर के दरवाजे या आंगन में इसे प्राकृतिक फूलों और रंगों से बनाया जाता था। घर के प्रवेशद्वार पर रंगोली बनाने की परंपरा भारत में सदियों से चली आ रही है। दिवाली पर मुख्य द्वार की देहरी पर आकर्षक रंगोली बनाने का रिवाज़ है। यदि घर के सामने खूबसूरत और रंग-बिरंगी रंगोली सजी हो तो मां लक्ष्‍मी सबसे पहले आपके ही घर पर पधारेंगी।

किंवदंतियों के अनुसार रंगोली का उद्भव भगवान ब्रह्मा के एक वचन से जोड़ा जाता है। इसके अनुसार एक राज्य के प्रमुख पुरोहित के पुत्र की मृत्यु से दुखी राजा व प्रजा ने भगवान ब्रह्मा से प्रार्थना की कि वह उसे जीवित कर दें। ब्रह्मा जी ने कहा कि यदि फर्श पर कच्चे रंगों से मुख्य पुरोहित के पुत्र की आकृति बनाई जाएगी तो वह उसमें प्राण डाल देंगे और ऐसा ही हुआ। इस मान्यता के अनुसार तब से ही आटे, चावल, प्राकृतिक रंगों एवं फूलों की पंखुड़ियों के द्वारा ब्रह्मा जी को धन्यवाद स्वरूप रंगोली बनाने की परंपरा आरम्भ हो गई।

वक्त बदला तो तरीका भी बदला है। आजकल रंगोली कई तरीकों से बनाई जाती है, इसमें कई तरह के इनोवेशन भी किए जा रहे हैं। कहीं फूलों से रंगोली बनाई जा रही है, कहीं पानी पर रंगोली बनाई जा रही है तो कहीं पारंपरिक ढंग से रंगोली बनाई जा रही है। आज रंगोली बनाने में बालू, फूल, चावल से लेकर अबीर तक का इस्तेमाल किया जाता हे। यही नहीं बल्कि बाजार में बनी बनाई कागज या प्लास्टिक की रंगोली भी मौजूद है। आइए, जाने के आज कौन-कौन सी रंगोली चलन में है और इसे कैसे बनाया जा सकता है। आप रंगोली चाहे जैसे बनाइये लेकिन उसके बीच में दिया सजाना बिल्‍कुल मत भूलियेगा वरना वह अधूरी रह जाएगी।

अगर आपको रंगोली बनानी नहीं आती तो उदास होने की कोई जरूरत नहीं है।  बाजार में रंगोली के रंगों के साथ - साथ विभिन्न प्रकार के डिजाइन भी उपलब्ध हैं , जिसकी मदद से चंद मिनटों में मन को लुभा लेने वाली रंगोली बनाई जा सकती है।
 
स्प्रे पेंट की रंगोली
बाजार में सभी रंगों के स्प्रे पेंट उपलब्ध हैं। आप कोई भी स्टेंसिल लेकर उसे चाहें तो मल्टी कलर स्प्रे पेंट से या फिर एक ही फैमिली के अलग-अलग रंगों से डिजाइन क्रिएट कर सकते हैं। इससे आप चुटकियों में बड़े से बड़ा डिजाइन बना सकती हैं।
 
क्ले की रंगोली
क्ले की रंगोली को किसी भी सतह पर उभारकर बनाया जाता है। इसमें पेपर मैश क्ले का यूज़ होता है। इससे फूल, पत्तियां या फिर किसी भी तरह का आकार बनाया जा सकता है। क्ले के काम के बाद इसे मनचाहे रंगों से पेंट कर सकते हैं।
 
फ्लोटिंग रंगोली
इस रंगोली को ओएचपी शीट पर बनाया जाता है। शीट को मनचाहे आकार में काट लें, फिर उस पर गिलटर और कुंदन व मोती से सजाएं। ये रंगोली पानी पर तैरती रहती है।
 
पानी पर रंगोली
घर छोटा है तो छोटे बाउल में पानी में रंगोली बना सकती हैं। पानी की रंगोली के लिए बाउल में पानी लें। पानी ठहर जाने पर इसमें चारकोल पाउडर बुरक दें। अब रंगोली के रंग बिखेरें। फूलों की पंखुडियों और फ्लोटेड कैंडल्स से इसे खूबसूरत बनाएं। पानी की सतह पर रंगों को रोकने के लिए चारकोल की जगह डिस्टेंपर या पिघले हुए मोम का भी प्रयोग किया जाता है।
 
फूलों की रंगोली
सिर्फ फूलों से भी रंगोली बना सकती हैं। आप चाहें तो फूलों की पंखुडियों का प्रयोग कर सकती हैं या छोटे व बड़े आकार के अलग अलग फूलों का भी इस्तेमाल कर सकती हैं। तो क्यों न इस दिवाली अपने घर-द्वार को रंगबिरंगी फूलों की डिजाइन से सजाएं और त्योहार का लुत्फ उठाएं।

सैंड की रंगोली
सैंड की मल्टी कलर रंगोली आप चाहें तो हाथ से या फिर स्टेंसिल से बना सकती हैं। चाहे तो कार्बन से फ्लोर पर डिज़ाइन ट्रेस करके भी यह रंगोली बना सकती हैं। इसमें आप ब्राइट कलर्स और कन्ट्रासट कलर्स का यूज़ कर सकती हैं। स्टे्ंसिल से यदि सैंड डालनी हो तो स्प्रे कलर्स का यूज़ करें और आउटलाइन बनाने के लिए व्हाइट सैंड को रंगोली पैन से भरें और किसी भी बड़ी रंगोली में डिटेल वर्क कर सकते हैं।

Edited by:Meenakshi Gandhi

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