जिस घर में पति की सेवा होती है उस घर में...

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Thursday, October 31, 2013-8:27 AM

 

सतगुरू की कृपा से इंसान को ब्रहम ज्ञान प्राप्त होता है। जिससे इंसान के भ्रम दूर हो जाते हैं, जात पात के भेद भाव से ऊपर उठकर वह एक नूर को देखता है। सबका आदर सत्कार करता है। इस ज्ञान को ज्यों ज्यों जीवन में अपनाते चले जाते हैं त्यों त्यों ही सुख जीवन में आ जाते हैं।

सतगुरू के लिए जगत की आसक्ति छोड़नी पड़े तो उसको छोड़ दो लेकिन जगत की आसक्ति के लिए सतगुरू को कभी न छोड़ो। सुबह उठो तो उससे थोड़ी देर विश्रांति पाकर, प्रार्थना करके, बाद में अपना जिस नथूने से श्वास चलता है वही हाथ मुंह को उसी तरफ घुमाकर वही पैर धरती पर रखोगे तो आपको हर कार्य में सफलता मिलेगी।

जिस घर में बुजुर्गों का आदर आदब होता है। उस घर में धन की कमी नहीं होती। जिस घर में पति की सेवा होती है उस घर में सारे सुख पनपते हैं। हर घर की बेटी चाहे वो बहन के रूप में हो या मां के रूप में हो तो उसका हम आदर सत्कार करते व मान सम्मान करते हैं तो उस घर में बीमारी अपने पैर नहीं पसारती। बेटियों के सम्मान व समृद्धी से धन आता है।

दुख का मुख्य कारण मान यानि इगो है। जैसे ही भक्त अपने सतगुरू के मुताबिक अपने जीवन को ढालता है। इगो भी कम हो जाती है। आनंद में एक रस आस्था प्राप्त हो जाती है। भक्त तीन प्रकार के होते हैं मुखिया, दुखिया और सुखिया

मुखिया मुखिया वह है जो बोल तो बड़े बड़े करता है पर कर्म साथ में नहीं होता।

दुखिया दुखिया वह है जो दूसरों की निंदा नहीं करता व अवगुणों की चर्चा नहीं करता।

सुखिया सुखिया वह है जो दुसरों को बड़ते हुए देखकर खुश होता है। सत्संग सेवा सिमरण करता है, हर हाल में खुश रहता है और स्वंय को हर हाल में सुखी अनुभव करता है।


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