झूठ की जुबान का रहस्य

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Friday, November 01, 2013-7:09 AM

एक बार घूमते-घूमते दुर्वासा ऋषि जी वृन्दावन में आए और अपने चेलों से कहा कि जाओ, "कृष्ण से कहो कि हम सब भजन करेंगे।"

संदेश पहंचते ही कृष्ण जी ने गोपियों से कहा कि," फटाफट भोजन तैयार करो और ऋषि जी के पास पहुंचाओं तनिक भी विलंब न होने पाए।"

गोपियों ने सब काम छोड़ कर कृष्ण जी के आदेश का पालन किया। जब भोजन तैयार हो गया तो गोपियां कृष्ण से बोली," आज तो यमुना जी में बड़े आवेग से पानी बह रहा है, हम आगे कैसे जा पाएंगे।"

कृष्ण जी बोले," तुम यमुना पार खड़ी होकर कहना कि, यदि कृष्ण ने आज तक किसी पर नारी का अंग नहीं छूआ हो तो हे यमुना जी हमें रास्ता दे दो।"

सब गोपियों ने ऐसा ही किया और यमुना जी ने रास्ता दे दिया। सब गोपियों ने ऋषि जी और उनके चेलों को भर पेट भोजन करवा दिया। जब वापिस आने लगी तो दुर्वासा जी से बोली," यमुना जी में बड़े आवेग से पानी बह रहा है, हम वापिस कैसे जा पाएंगी।"

दुर्वासा ऋषि जी बोले," जाओ यमुना के तट पर खड़े होकर कहना कि,यदि दुर्वासा ऋषि ने जिंदगी भर खाना न खाया हो तो तुरंत रास्ता दे दो।"

गोपियों ने वैसा ही किया और यमुना ने रास्ता दे दिया। सब बड़ी हैरान हुई। जाकर कृष्ण से बोली, "यह रहस्य क्या है एक झूठ की जुबान पर बैठकर यमुना जी के पार चली गई और दूसरे झूठ की जुबान पर बैठकर यमुना जी पार करके वापिस आ गई।"

तब कृष्ण बोले," मैं तो प्रकाश स्वरूप हूं, प्रकाश तो किसी को छूता नहीं, वह तो सब जगह पड़ता है, जगह चाहे अच्छी हो या गंदी।"

तब गोपियां श्री कृष्ण जी को लेकर दुर्वासा ऋषि के पास गई और बोली," हम अभी तो आपको भोजन करवा कर गई थी। फिर आप कैसे मानते हैं कि अपने कभी भोजन नहीं किया।"

तो दुर्वासा ऋषि बोले," मैं जब भी कुछ खाता हूं तो उसे भगवान के अर्पण कर देता हूं। भोजन खाते समय यह भाव रखता हूं कि स्वंय भगवान ही खा रहे हैं।"

संसार में रहकर जो भी कार्य किए जाए वह इसी भाव से करें तो आप सबकी सेवा में ही स्वंय को लगा हुआ पाएंगे। तो फिर आप अपने प्रत्येक कार्य में आनंद का अनुभव करेंगे। आप लगन से हर काम में जुट जाओगे। इसे ही निष्काम कर्मयोग कहते हैं। कर्तव्य समझकर फल की भावना त्याग कर यदि मनुष्य संसार में हर काम करता है तो वह फिर न तो बईमानी करेगा, न भ्रष्टाचार का सहारा लेगा। लोभ, मोह, अहंकार उसका अपने आप छुट जाएगा। जिससे उसका अपना तो कल्याण होगा ही साथ ही वह जिस समाज व देश में रहता है अनका भी कल्याण निश्चित है।

 


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