पंच महोत्सव से कैसे लाएं जीवन में सुख, समृद्धी और सौभाग्य

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Friday, November 01, 2013-10:03 AM

भारतीय संस्कृति में दीपक ज्ञान और प्रकाश का प्रतीक माना जाता है। वास्तव में दीपावली पांच दिनों का त्यौहार है। दीपावली कृष्ण त्रयोदशी (धनतेरस) से कार्तिक शुक्ल द्वितीया (भाई दूज) तक मनाते हैं। यही वजह है कि महापर्व दीपावली को पंच महोत्सव कहकर भी संबोधित किया जाता है। सुख, समद्धी और सौभाग्य का प्रतिक है दीपावली।

हिंदू धर्म ग्रंथों में धनतेरस के बारे में प्रचलित कथा के अनुसार कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी के दिन समुद्र मंथन से आयुर्वेद के जनक भगवान धनवंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। उन्होंने देवताओं को अमृत पान करवाकर अमर कर दिया था। यही वजह है कि आज भी आयु और स्वास्थय की कामना से धनतेरस के दिन भगवान धनवंतरि की पूजा की जाती है।

दुर्लभ से दुर्लभ रोग से मुक्ति पाने के लिए रूद्राक्ष की माला से इस मंत्र का जाप करें

मंत्र ॐ देव चिकित्सक भगवान धन्वन्तरि देवाय नम:

जाप के बाद माला आर्शीवाद स्वरूप गले में पहनें।

पंच महोत्सव का दूसरा दिन यानी नरक चतुर्थी है। मान्यता है कि इस दिन भगवान श्री कृष्ण ने नरकासुर नामक दैत्य का वध करके 16000 देवीयों को उसकी कैद से मुक्त कराया था तथा लोगों को उसकी क्रूरता और आत्याचार से मुक्ति दिलाई थी। नरक चतुर्दशी को छोटी दीपावली भी कहा जाता है। लक्ष्मी की प्राप्ति व दरिद्रता दूर करने के लिए निम्न मंत्र की 108 बार जाप करें

कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने
प्रवर क्लेश नाशाय गोविंन्दाय नमों नम:


 पंच महोत्सव का तीसरा दिन यानी लक्ष्मी पूजन। अमावस्या की अत्यंत काली रात्रि में पूजा,उपासना, तांत्रिक अनुष्ठान करने से लक्ष्मी की विशेष सिद्धियां प्राप्त होती हैं। कहा जाता है कि दीपों का यह प्रकाश पर्व श्री राम के चौदह बरस के वनवास के बाद लंका विजय पर अयोध्या लौटने की खुशी में मनाया जाता है। कमलगट्टे, स्फटिक अथवा मूंगे की माला से दस माला जाप करें

ॐ ह अष्टलक्ष्म्यै दारिद्रय विनाशिनी
सर्व सुख समृध्दि देहि ही ॐ नम:

 पंच महोत्सव का चौथा दिन यानी बलि पूजा, अन्न कूट, मार्गपाली, गोवर्धन पूजा के रूप में मनाया जाता है। इस दिन अनेक प्रकार के पदार्थ जिन्हें "छप्पन भोग" कहते हैं। भगवान को अर्पण करने का विधान है। इस दिन भगवान श्री कृष्ण ने इंद्र की पूजा को बंद करा कर इस के स्थान पर गोवर्धन पूजा को प्रारंभ किया था। आज के दौर में गोवर्धन ब्रज की छोटी पहाड़ी है, किन्तु इसे गिरिराज अर्थात समस्त पर्वतों का राजा कहा जाता है। गोवर्धन पर्वतों का राजा और हरि का प्यारा है। इसके समान पृथ्वी और स्वर्ग में कोई दूसरा तीर्थ नहीं है।

पंच महोत्सव का पांचवा दिन है भाई दूज दीपावली की घोर अमावस्या के बाद जिस दिन चंद्रमा के दर्शन होते हैं, उसी दिन भारत में सर्वत्र भैया दूज का पर्व मनाया जाता है। यह दिन यम द्वितीया भी कहलाता है इसलिए इस पर्व पर यम देव की पूजा भी की जाती है। मान्यता है कि इस दिन जो यम देव की उपासना करता है, उसे असमय मृत्यु का भय नहीं रहता। इस दिन बहन अपने भाई के तिलक लगाकर स्नेह-प्रेम की अभिव्यक्ति करती हैं।


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