भाई-बहन के प्रेम का पर्व भैया दूज

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Monday, November 04, 2013-2:07 PM

पंच पर्व महोत्सव  दीवाली का पांचवां पर्व भैया दूज है जिसे यम द्वितीया भी कहा जाता है। यह भाई बहन के पवित्र प्रेम का प्रतीक है तथा देश भर में बड़े सौहार्दपूर्ण  ढंग से मनाया जाता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों के माथे पर केसर का तिलक लगाती हैं तथा उनकी लम्बी आयु की कामना करती हैं।  यह पर्व दीवाली से दो दिन बाद यानी कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया को मनाया जाता है जो इस बार 5 नवम्बर को है।

इस दिन यमुना में स्नान करना, माथे पर बहन के हाथों से तिलक लगवाने तथा बहन के हाथ से बना भोजन खाने की मान्यता है।  बहनें अपने भाई की लम्बी आयु के लिए यम की पूजा करती हैं और व्रत भी रखती हैं। राखी की तरह इस दिन भी भाई अपनी बहन को अनेक उपहार देते हैं। मान्यता है कि  अपने भाई को राखी बांधने के लिए बहनें उनके घर जाती हैं परंतु  भैया दूज पर भाई अपनी बहन के घर जाता है।  जो भाई अपनी बहन से स्नेह और  प्रसन्नता से मिलता है, उसके घर भोजन करता है उसे यम पीड़ा से छुटकारा मिल जाता है।  कार्तिक शुक्ल द्वितीया को चित्रगुप्त का भी पूजन किया जाता है।

पौराणिक कथा: भगवान सूर्य नारायण की पत्नी संज्ञा की दो संतानें उत्पन्न हुईं जिनमें एक थी यमुना तथा दूसरा यमराज।  सूर्य की गर्मी को सहन न कर पाने के कारण संज्ञा उत्तरी ध्रुव में छाया होकर रहने लगी। वहां उसने ताप्ती (नदी)  और शनिचर दो और संतानों को जन्म दिया। ऐसे में छाया यमुना और यमराज के दूसरी देह से होने के कारण उनसे विमाता जैसा व्यवहार करने लगी जिस कारण  यमराज ने यमलोक बसाया और वहां सृष्टि को दण्ड देने का कार्य सम्भाला तथा यमुना भूलोक में बहने लगी। एक दिन यमराज को अपनी बहन की याद आई तो वह उसे ढूंढते हुए  उसके पास आए।  यमुना ने भाई को मिल कर उसका खूब आदर-सत्कार किया  तथा खूब बढिय़ा पकवान बना कर भाई को खिलाए ।

यमराज ने प्रसन्न होकर यमुना को वरदान मांगने को कहा तो यमुना ने कहा कि जो भाई यमुना में स्नान करेंगे उन्हें यमलोक में जाना नहीं होगा । ऐसे में भाई यमराज ने कहा कि , ‘‘यमुना तू तो हजारों मीलों में बहती हो। यदि मैंने यह वरदान तुझे दे दिया तो  यमलोक ही उजड़ कर रह जाएगा। ऐसे में यमुना ने कहा कि भैया चिंता मत करो, जो भाई  आज के दिन मथुरा के विश्राम घाट पर स्नान करेगा, बहन के हाथ से मस्तक पर टीका करवाएगा, बहन के हाथ का बना भोजन  खाएगा तथा यमराज की कथा सुनेगा उसे यम यातना  से छुटकारा मिल जाएगा। भाई यमराज ने बहन यमुना को यह वरदान दिया। उस दिन कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि थी। तब से यह परम्परा है कि बहनें आज भी अपने भाइयों के माथे पर केसर अथवा रौली से तिलक लगा कर यमराज से उनकी लम्बी आयु की कामना करती हैं।       

कैसे मनाएं बहनें भैया दूज: वैसे तो कार्तिक मास महात्म्य का महीना है तथा इस दिन  किए गए स्नान , दान एवं पुण्य कर्मों का फल कई गुणा अधिक है परंतु भैया दूज को  यमुना नदी में  स्नान करने का बड़ा महत्व है। बहने पवित्र जल में स्नान करने के पश्चात मार्कण्डेय, बली, हनुमान, विभीषण, कृपाचार्य और परशुराम जी आदि आठ चिरंजीवियों का विधिपूर्वक पूजन करें, बाद में भार्इ के माथे पर तिलक लगाते हुए सूर्य , चन्द्रमा, पृथ्वी तथा सभी देवताओं से अपने  भार्इ के परिवार की सुख समृद्धी के लिए प्रार्थना करें। भार्इ का मुंह मीठा करवाएं। भार्इ अपनी बहन को अपनी सामर्थय के अनुसार उपहार दें।
 


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