कृष्ण भगवान को मोर मुकुटधारी क्यों कहा जाता है ?

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Tuesday, November 05, 2013-10:23 AM
कृष्ण भगवान मोर का पंख इसलिए धारण करते हैं क्योंकि मोर और मोरनी संयोग नहीं करते मोरनी तो नाचते हुए मोर के आंसुओं को खाकर ही गर्भवती होती है इसलिए कृष्ण जी सिर पर मोर पंख धारण करके यह बताते हैं कि संसार वासियों को भोगों में लिप्त नहीं होना चाहिए। जब यह भाव रखोगे कि मैं कर्ता नहीं तो फिर भोक्ता कैसे हो सकते हो।
 

शास्त्रों के अनुसार विष्णु जी के अब तक दस अवतार हो चुके हैं मगर कृष्ण जी के सिवाय किसी अन्य वतार में उन्होंने मोर मुकुट धारण नहीं किया। बाल्यकाल में जब बलराम और श्री कृष्ण को यशोदा मईया मुकुट पहना रही थी तो भगवान् कृष्ण मुकुट न पहनने की हठ करने लगे। तब नन्द बाबा नें मुकुट पर मोर पंख लगा दिया। उसे देखकर भगवान कृष्ण बहुत खुश हुए और उसे प्रसन्नता पूर्वक सर पर सुशोभित कर लिया। मोर पंख से बने मुकुट की शोभा का गुणगान नहीं किया जा सकता।

कुछ ज्योतिषशास्त्री मानते हैं कृष्ण जी की कुण्डली में दोष था। कुण्डली में मौजूद दोष के अशुभ प्रभावों को दूर करने के लिए कृष्ण हमेशा मोर पंख को अपने सिर पर रखते थे। इसका प्रमाण है कि कृष्ण जी ने 36 वर्ष के बाद समस्त प्रकार के ऐश्वर्य पाने के बावजूद उनका सुख नहीं भोग सके।

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