क्या लाभ ऐसे प्रवचन का

  • क्या लाभ ऐसे प्रवचन का
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Saturday, November 16, 2013-9:28 AM

उसके एक हाथ में लाठी थी, दूसरे हाथ में कटोरा कसकर पकड़ रखा था। गर्दन को ऊंची नीची करता शून्य में टिकी आंखों को बन्द करता खोलता एक-एक पग गिनता सा चलता जा रहा था। आयु के प्रभाव ने उसे कुबड़ा बना दिया था।

अचानक वह चीखा चिल्लाया, गिरा, लाठी व कटोरे को कांपते हाथों से टटोलता सा खड़ा हुआ। गंजे सिर से पतली सी खून की धार बह निकली थी। उसके हाथ में लाठी आई कटोरा टटोलने के बावजूद हाथ नहीं लगा। फिर वह कार उस कटोरे को भी रौंदती हुई झटके से आगे बढ़ गई। कटोरे में पड़ी एकाध रोटीयां भी रौंदती हुई झटके से आगे बढ़ गई। कटोरे में जो एकाध रोटी पड़ी थी वह कटोरे के साथ ही पिस गई और तभी उस कार में से आवाज आई, औफ.............फो, ड्राइवर जल्दी चलो महाराज का प्रवचन शुरू हो चुका होगा।

 

 


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