अमूल्य धन की प्राप्ति के लिए...

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Monday, November 18, 2013-9:57 AM

किसी गांव में एक संत आए। उनकी ख्याति सुन कर गांव का एक किसान उनसे मिलने पहुंचा। उसने अपने कुछ कष्ट उन्हें बताय और मुक्ति की राह पूछी। संत बोले," मैं तुम्हें वैकुण्ठधाम लिए चलता हूं। ऐसा करने से तुम कष्टों से पूर्णत मुक्त हो जाओगे।"

यह सुनकर किसान बोला, महाराज अभी तो मेरे बच्चे बहुत छोटे हैं। जब दस साल बाद वे बड़े हो जाएंगे और काम धंधे में लग जाएंगे," तब मैं आपके साथ चलूंगा।"

दस साल के बाद संत फिर गांव में आए ओर किसान से वैकुण्ठधाम चलने को कहा। किसान बोला," एक महीने पहले ही मेरे लड़के का विवाह हुआ है। आपकी कृपा से पौते का मुंह देख लूं फिर आवश्य चलूंगा।"

दस साल और बीत गए। संत फिर गांव पहुंचे तो किसान के घर के बाहर एक कुत्ता बैठा मिला। संत ने योगबल से जान लिया यह कुत्ता ही पूर्व जन्म में किसान था। फिर उन्होंने अपने योगबल से उस कुत्ते को अपने पूर्वजन्म में किए वायदे की याद दिलाई, तो वह बोला," स्वामी जी मेरे पोते अभी नादान हैं। आजकल जमाना बहुत खराब है मुझे अपने घर की रखवाली करनी है। हां दस साल बाद निश्चित रूप से आपके साथ चलूंगा।"

संत ने कहा," अब नहीं आऊंगा क्योंकि तुम फिर कोई बहाना खोज लोगे।"

सार यह है कि संसारी जीव मोह से कभी मुक्त नहीं हो पाता। व्यक्ति की संतुष्टी का कोई अंतिम बिंद नहीं है। संतोष रूपी अमूल्य धन की प्राप्ति

किसी गांव में एक संत आए। उनकी ख्याति सुन कर गांव का एक किसान उनसे मिलने पहुंचा। उसने अपने कुछ कष्ट उन्हें बताय और मुक्ति की राह पूछी। संत बोले," मैं तुम्हें वैकुण्ठधाम लिए चलता हूं। ऐसा करने से तुम कष्टों से पूर्णत मुक्त हो जाओगे।"

यह सुनकर किसान बोला, महाराज अभी तो मेरे बच्चे बहुत छोटे हैं। जब दस साल बाद वे बड़े हो जाएंगे और काम धंधे में लग जाएंगे," तब मैं आपके साथ चलूंगा।"

दस साल के बाद संत फिर गांव में आए ओर किसान से वैकुण्ठधाम चलने को कहा। किसान बोला," एक महीने पहले ही मेरे लड़के का विवाह हुआ है। आपकी कृपा से पौते का मुंह देख लूं फिर आवश्य चलूंगा।"

दस साल और बीत गए। संत फिर गांव पहुंचे तो किसान के घर के बाहर एक कुत्ता बैठा मिला। संत ने योगबल से जान लिया यह कुत्ता ही पूर्व जन्म में किसान था। फिर उन्होंने अपने योगबल से उस कुत्ते को अपने पूर्वजन्म में किए वायदे की याद दिलाई, तो वह बोला," स्वामी जी मेरे पोते अभी नादान हैं। आजकल जमाना बहुत खराब है मुझे अपने घर की रखवाली करनी है। हां दस साल बाद निश्चित रूप से आपके साथ चलूंगा।"

संत ने कहा," अब नहीं आऊंगा क्योंकि तुम फिर कोई बहाना खोज लोगे।"

सार यह है कि संसारी जीव मोह से कभी मुक्त नहीं हो पाता। व्यक्ति की संतुष्टी का कोई अंतिम बिंद नहीं है। संतोष रूपी अमूल्य धन की प्राप्ति सभी प्रकार के मोह से विरक्त होने पर ही होती है।

 

 

 



 

 

 

 


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