क्या प्रमाण है कि परमात्मा हमारे साथ है

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Saturday, November 23, 2013-11:29 AM
द्रौपदी भगवान श्री कृष्ण की परम भक्ता है। वह श्री कृष्ण से कहती है," भगवन चार कारण हैं चार संबंध हैं मेरे तुम्हारे साथ। अत: आपको मेरी रक्षा करनी ही होगी। आप मेरे सखा, स्वामी, सम्बन्धी और सर्वस्व हो इसलिए मेरी रक्षा तो करनी ही होगी।"

इतनी दृढ़ भक्ता। ऐसी परमात्मा की दृढ़ भक्ता द्रौपदी पर ऐसी विपत्तियां आई कि जिनकी तुलना नहीं है। उसके किशोरावस्था के पांच पुत्र जिनका अभी विवाह भी नहीं हुआ था। रात में सोते समय अश्वत्थामा द्धारा मार दिए गए। इससे बड़ी विपत्ति किसी मां या स्त्री पर क्या आ सकती है परंतु द्रौपदी ने अपना धीरज व संतुलन नहीं खोया। अश्वत्थामा को जब उसके सामने लाया गया तो उसने उसे जीवन दान दिया और कहा, "ये ब्रह्माण है, गुरूपुत्र है। श्रद्धा से पूज्य है। यदि इसे मार दोगे तो जैसे मैं अपने बेटों के लिए रो रही हूं। उसी तरह इसके मारे जाने पर इसकी मां भी रोएगी।"

जरा जीवन पर दृष्टीपात करें जीवन में दुख हैं, थोड़े नहीं बहुत हैं। जीवन में अंधेरा है थोड़ा नहीं बहुत है। जीवन में समस्याएं हैं थोड़ा नहीं बहुत है। जीवन में संताप है थोड़ा नहीं बहुत है परंतु इनमें हमारे धैर्य और प्रेम की परीक्षा भी तो है और फिर यह किसके जीवन में नहीं है। सबके जीवन में आते हैं। ऐसे में मन का संतुलन बनाएं रखना चाहिए। पाडंवों का जीवन दुखों से भरा था मगर श्री कृष्ण की कृपा उन पर सदा बनी रही। छाया की तरह उनके पीछे - पीछे रहते थे।

जीवन है तो परमात्मा के साथ होने का प्रमाण है। परमात्मा तुम्हारे भीतर मौजूद है। परमात्मा तुम्हें छोड़ नहीं सकता। वह जीवन के प्रत्येक पथ पर तुम्हारे साथ है अवश्यकता है तो उसे पहचानने की। मनुष्य के जीवन में अधीरता तब होती है जब उसे परमात्मा पर विश्वास नहीं होता।


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