सोमवार को ही शिव का वार क्यों कहा जाता है

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Monday, November 25, 2013-7:23 AM

भगवान शंकर की उपासना प्रत्येक दिन अलग अलग फल प्रदान करती है।

पुराणशिरोमणि शिवमहापुराण के अनुसार- आरोग्यंसंपद चैव व्याधीनांशांतिरेव च। पुष्टिरायुस्तथाभोगोमृतेर्हानिर्यथाक्रमम्॥

अर्थात स्वास्थ्य, संपत्ति, रोग-नाश, पुष्टि, आयु, भोग तथा मृत्यु की हानि के लिए रविवार से लेकर शनिवार तक भगवान शंकर की आराधना करनी चाहिए। सभी दिनों में शिव फलप्रद हैं। पुराणों के अनुसार सोम का अर्थ चंद्रमा होता है और चंद्रमा भगवान शंकर के शीश पर मुकुटायमान होकर अत्यन्त सुशोभित होता है।

भगवान शंकर ने जैसे कुटिल, कलंकी, कामी, वक्री एवं क्षीण चंद्रमा को उसके अपराधी होते हुए भी क्षमा कर अपने शीश पर स्थान दिया वैसे ही भगवान हमें भी सिर पर नहीं तो चरणों में जगह अवश्य देंगे। यह याद दिलाने के लिए सोमवार को ही लोगों ने शिव का वार बना दिया और सोम का अर्थ सौम्य होता है।

भगवान शंकर अत्यन्त शांत समाधिस्थ देवता हैं। इस सौम्य भाव को देखकर ही भक्तों ने इन्हें सोमवार का देवता मान लिया। सहजता और सरलता के कारण ही इन्हें भोलेनाथ कहा जाता है। सोम का अर्थ चंद्रमा भी होता है और चंद्रमा मन का प्रतीक है। जड़ मन को चेतनता से प्रकाशित करने वाला परमेश्वर ही है। मन की चेतनता को पकड़कर हम परमात्मा तक पहुंच सके इसलिए देवाधिदेव भूतभावन पूतपावन परमेश्वर की उपासना सोमवार को की जाती है।

 


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