इस शिवलिंग के दर्शन करने से जन्म - जन्मांतर के पाप पल भर में खत्म हो जाते हैं

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Monday, November 25, 2013-7:34 AM
पुराणों में वर्णित कथाओं के आधार पर देवी - देवताओं द्वारा अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति हेतु भगवान् भोलेनाथ की अराधना की गई है। भगवान राम ने स्वयं रावण पर विजय प्राप्त करने हेतु सागर तट पर शिवलिंग की स्थापना कर पूजन किया था। जिस शिवलिंग की उन्होंने स्थापना करी वो आज रामेश्वर तीर्थ के नाम से विख्यात है। इस शिवलिंग के दर्शन करने से जन्म - जन्मांतर के पाप पल भर में खत्म हो जाते हैं।

दानवों के साथ युद्ध में जब भगवान् विष्णु असफल हो गए तो कैलाश पर्वत में भगवान विष्णु ने हरीश्वर नामक शिवलिंग की स्थापना कर प्रतिदिन 1000 कमल पुष्पों को चढाते हुए विष्णुसहस्त्रनाम का पाठ लगातार कई बरसों तक किया। जिससे प्रसन्न होकर भोलेनाथ ने भगवान विष्णु को सुदर्शन चक्र प्रदान किया तत्पश्चात विष्णु जी ने दानवों का संहार किया।

माता सती जिनका शरीर श्याम वर्ण का था गौर वर्ण धारण करने के लिए माता सती ने गौरीश्वर नामक शिवलिंग की स्थापना की और एक पैर पर खड़े होकर आराधना की भगवान् शिव प्रसन्न होकर माता सती को गौर वर्ण का कर दिया। माता सती को आज भी गौरी नाम से पूजा जाता है।

द्वापर युग में भगवान कृष्ण ने बटुकांचल पर्वत पर 7 महीने तक भोलेनाथ की पूजा कर अनेक वरदान प्राप्त किए ओर बहुत से प्रमाण है जब देवताओं ने भगवान शिव की आराधना की और अपने कष्टों को दूर किया। विचार करने योग्य तथ्य है जब भोलेनाथ की आराधना से देवताओं के दुःख दूर हो सकते है तो हम तो साधारण मनुष्य है।


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